‘दलितों के हाथ-पैर बांध कर पीटती हूं’, महिला डीएसपी का कथित वीडियो वायरल

वीडियो में महिला अधिकारी यह भी कहती सुनी जा रही हैं कि उन्होंने ऐसे 21 दलितों पर फर्जी केस किए, जो उनके थाने में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत केस दर्ज कराने गए थे।

जनसत्ता ऑनलाइन के मुताबिक महाराष्ट्र के बीड जिले से एक वीडियो वायरल हुआ है। कथित तौर पर यह वीडियो एक महिला पुलिस अधिकारी है जिसमें वह यह कहती दिख रही हैं कि कैसे वे दलितों और मुसलमानों के खिलाफ झूठे केस दर्ज करती हैं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद बवाल मच गया है। वीडियो में अधिकारी यह कहती दिख रही हैं, “मैं दलितों का हाथ पैर बांधकर उनके उपर एट्रोसिटी एक्ट का गुस्सा निकालती हूं।” कथित तौर पर वीडियो में जो अधिकारी दिख रही हैं, वो मजलगांव तालुका की डीएसपी भाग्यश्री नवटाके हैं। वो यह बात अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज मामले के आरोपी से कह रही हैं।

वीडियो में महिला अधिकारी यह भी कहती सुनी जा रही हैं कि उन्होंने ऐसे 21 दलितों पर फर्जी केस किए, जो उनके थाने में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत केस दर्ज कराने गए थे। वीडियो की शुरूआत में वो कहती हैं कि उन्होंने मुस्लिमों के खिलाफ इंडियन पैनल कोड की धारा 307 या हत्या के प्रयास के तहत मामले भी दर्ज किए हैं ताकि उन्हें आसानी से जमानत नहीं मिल सके।

यह वीडियो क्लिक कई टीवी चैनलों पर दिखाया जा रहा है। वीडियो में दिख रही महिला अधिकारी मराठियों के एक समूह से बात कर रही हैं। उनकी बातचीत से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बात करने वाले लोग अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज केस में गिरफ्तारी के बाद जमानत के लिए सलाह लेने आए थे। महिला अधिकारी उन्हें कहती है कि यदि वह उन्हें अभी छोड़ देती हैं तो हिंसक प्रतिक्रिया हो सकती है।

बातचीत के क्रम में महिला अधिकारी कहती हैं कि कैसे उन्होंने इसी तरह के एक केस को डील किया था, जब वे पुणे शहर के नजदीक पिंपरी में तैनात थी। उन्होंने कहा कि तीन दिनों तक उन्होंने आरोपी मराठी को गिरफ्तार नहीं किया और इसके बदले में बताया कि कैसे दलित के खिलाफ वे झूठा केस दायर करे। उन्होंने आरोपी को सलाह दी थी कि आईपीसी की धारा 122 के तहत वह दलित के ऊपर केस करें क्योंकि यह बिना लाइसेंस के हथियार रखने का अपराध है। इस मामले में भी जल्दी जमानत नहीं मिलती है।