अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में पहलू खान लिंचिंग पर शॉर्ट फिल्‍म प्रदर्शित, संघ ने जताई नाराजगी

आरएसएस नेताओं का कहना है कि इस फिल्म में मामले का एक पक्ष ही दिखाया गया है। साथ ही अन्तरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने दिखाने से गलत मैसेज जाएगा और देश की छवि को नुकसान पहुंचेगा।

सरकार के एक फिल्म फेस्टिवल में पहलू खान मॉब लिंचिंग घटनाक्रम पर बनायी गई एक शॉर्ट फिल्म प्रदर्शित की गई है। जिस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने नाराजगी जाहिर की है। बता दें बीते साल अप्रैल माह में राजस्थान के अलवर में गोतस्करी के आरोप में पहलू खान नामक व्यक्ति की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है। बीते हफ्ते गोवा में आयोजित हुए इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के नेशनल फिल्म डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन के फिल्म बाजार समारोह के दौरान पहलू खान की मॉब लिंचिंग पर बनी फिल्म का प्रदर्शन किया गया था। फिल्म का शीर्षक अल-वार था, जिसकी टैगलाइन थी कि “धर्म मांस नहीं खाता, ब्लकि इंसानों को खाता है।”

समारोह के दौरान फिल्म को काफी सराहा गया, लेकिन आरएसएस के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस पर नाराजगी जाहिर की है। इस फिल्म का निर्देशन जयदीप यादव द्वारा किया गया है और फिल्म को प्रोड्यूस रैपचिक फिल्म्स द्वारा किया गया है। फिल्म में एक गरीब मुस्लिम परिवार की कहानी दिखाई गई है, जो पशुपालन कर अपनी आजीविका चलाता है। फिल्म में दिखाया गया है कि मुस्लिम परिवार अपने पशुओं से बेहद प्यार करता है। फिल्म के निर्देशक ने ये भी बताया है कि उन्हें फिल्म का क्लाइमैक्स पुलिस की सुरक्षा में शूट करना पड़ा था, क्योंकि हिंदू संगठनों ने उनकी शूटिंग को 2 बार बाधित करने का प्रयास किया था।

यह शॉर्ट फिल्म, फिल्म समारोह के Viewing section में दिखाई गई थी। इकॉनोमिक टाइम्स की एक खबर के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने इसकी निंदा की है और आरोप लगाया कि “इस फिल्म में इस मामले का एक पक्ष दिखाकर हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश की गई है। जैन ने कहा कि इस मामले की जांच अभी चल रही है। ऐसे में इस मामले पर बनी फिल्म को सरकारी फिल्म समारोह के साथ ही कहीं भी प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए।” आरएसएस के एक पदाधिकारी ने भी इस पर आपत्ति जतायी और कहा कि “फिल्म को ऐसे फोरम पर प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए था, जहां अन्तरराष्ट्रीय मेहमान मौजूद थे, इससे देश की गलत छवि बनती है।”