क्या आप केअख़बार ने ये खबर दी: “सरकार आरएसएस का एजंडा लागू कर रही है, सामाजिक न्याय का नहीं”

संजय कुमार सिंह

आज के अखबारों में आपको क्या कहीं ऐसा कोई शीर्षक मिला? केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाह ने इस्तीफा दे दिया है। इस खबर का शीर्षक यही हो सकता है और दूसरा यह भी कि केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार आरएसएस का एजंडा लागू कर रही है, इस्तीफा दिया या सरकार सामाजिक न्याय के एजंडे की अनदेखी कर रही है, इस्तीफा। इसी खबर का एक और शीर्षक हो सकता है, साढ़े चार साल मंत्रीमंडल में रहने के बाद कुशवाह का इस्तीफा। आप समझ सकते हैं कि एक ही मामले को अखबारों में कई तरह से परोसा जा सकता है और उससे आपको एक ही खबर अच्छी-बुरी या महत्वपूर्ण अथवा बेमतलब लग सकती है। आज के अखबारों में राजनैतिक महत्व की तीन बड़ी खबरें हैं। तीनों के अपने महत्व हैं। मैं भिन्न अखबारों में प्रकाशित खबरों के आधार पर तीनों से जुड़ी खास सूचनाएं आपको बता रहा हूं।

आप देखिए कि आपके अखबार ने इनमें से कितनी सूचनाएं दी हैं और कैसे दी है। अखबारों में इन खबरों को दी गई प्रमुखता के आधार पर ही ये तीन खबरें हैं – भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दिया दूसरी खबर है, ब्रिटेन की कोर्ट ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को भारत भेजने का आदेश दिया और तीसरी खबर मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा का केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना है। सबसे पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल का इस्तीफा। इसपर पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि सभी भारतीयों को चिन्ता करनी चाहिए क्योंकि विकास के लिए संस्थानों की मजबूती जरूरी है। हमें देखना होगा कि ऐसा क्या हुआ कि उर्जित को इस्तीफा देना पड़ा। यहां उल्लेखनीय है कि नोटबंदी से पहले उर्जित को रिजर्व बैंक का गवर्नर बनाया गया था और नोटबंदी का निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक को लेना था पर इसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने की थी।

आप जानते हैं कि नोट पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर का हस्ताक्षर होता है और वे धारक को नोट के बराबर मूल्य देने का वादा करते हैं। इस मामले में निर्णय और सूचना रिजर्व बैंक के गवर्नर के ही होने चाहिए पर नोटबंदी के दिनों में आपने देखा कि आदेश कैसे बदलते थे और कहां से आते थे। यह सब गवर्नर की कमजोरी या अक्षमता ही थी जो दरअसल उनकी नहीं थी। इसलिए वे पद पर बने रहे और खास माने गए। अब जब उन्होंने निजी कारणों से इस्तीफा दिया है तो ये निजी कारण कितने और कैसे निजी हैं ये आपको मीडिया से ही पता चलेगा। सतर्क रहिए आपका मीडिया आपको क्या बता रहा है। इसे कल की इस खबर के आलोक में देखिए कि नोटबंदी को लागू करने के तरीके को गलत बताया जा रहा है।

दूसरी खबर भारतीय बैंकों के साथ 9,000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी कर विदेश भागे शराब कारोबारी विजय माल्या को भारत लाने की राह में मिली कथित सफलता है। यह आदेश लंदन की कोर्ट ने सोमवार जारी किया है और विजय माल्या अभी तुरंत नहीं आएगा। उसे अपील के लिए 14 दिन का समय मिला है। उसके पास हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील के भी विकल्प हैं। उसे भारत आने में अभी समय लगेगे। हालांकि, लंबी प्रक्रिया के बाद पिछले साल दिसंबर से चल रहे प्रत्यर्पण के मुकदमे में लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट की चीफ मजिस्ट्रेट एम्मा अर्बथनॉट ने कहा कि आरोपों का सामना करने के लिए माल्या को भारत भेजा जा सकता है। जज ने अपना आदेश केंद्रीय गृह मंत्री साजिद जाविद के पास भेज दिया है।

अब उप्रेन्द्र कुशवाह का इस्तीफा। राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी (रालोसपा) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन राजग या एनडीए से भी अलग होने की घोषणा की है। कुशवाह बिहार से हैं और दलितों तथा अन्य पिछड़ा वर्ग का हित चाहते हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार आरएसएस का एजंडा लागू कर रही है, सामाजिक न्याय का नहीं? प्रधानमंत्री को भेजे अपने इस्तीफे में कुशवाहा ने लिखा है, केंद्रीय मंत्रिमंडल को महज रबर स्टांप बना दिया गया है जो किसी विचार-विमर्श के बिना सिर्फ आपके निर्णय की पुष्टि करता है …. मंत्री और अधिकारी सिर्फ दिखावे के लिए हैं क्योंकि तकरीबन सभी निर्णय आप, आपके कार्यालय और भाजपा अध्यक्ष द्वारा लिए जाते हैं। पत्र में कुशवाहा ने यह आरोप भी लगाया गया है कि जांच एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक विरोधी को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है न कि गरीबों के लिए। कुशवाहा के पत्र में ऐसे कई आरोप हैं और देखिए कि आपके अखबार ने आपको क्या बताया, कितना बताया।

दैनिक जागरण में, “अब माल्या का होगा प्रत्यर्पण” उपशीर्षक, “ब्रिटेन की अदालत ने भगोड़े कारोबारी को भारत लाए जाने को दी हरी झंडी” लीड है। इसके साथ “शिकंजा” के तहत बताया गया है, 14 दिनों के भीतर ब्रिटिश हाई कोर्ट में अपील करने का विकल्प और दूसरी संभवाना – राहत नहीं मिली तो लोकसभा चुनाव से पहले जेल में हो सकता है माल्या। और इसके साथ वित्त मंत्री अरुण जेटली का कोट है, देश को धोखा देने वाले किसी को भी बख्या नहीं जाएगा …. आदि आदि। और इसके साथ ब्रिटिश अदालत के फैसले का अंश, ऐसा कोई संकेत नहीं है जिससे लगे कि माल्या के खिलाफ झूठा केस बनाया गया है ….. (मेरा सवाल है कि होता तो यह आदेश आता? इसे इतनी प्रमुखता देने का मतलब?)

जागरण में उर्जित पटेल के इस्तीफे की खबर को सेकेंड लीड बनाया गया है। मुझे इस निर्णय का आधार नहीं समझ में आया। उर्जित का इस्तीफा ज्यादातर अखबारों में लीड है। इसे सेकेंड लीड बनाना और माल्या का मामला जो अभी हाई कोर्ट में जाना है, लीड बनाना भारत में पत्रकारिता पर अनुसंधान करने वालों के लिए एक विषय हो सकता है। हालांकि अखबार ने भी इसका एक कारण मुख्य खबर के साथ बॉक्स में बताया है। शीर्षक है, पहले भी ऐसा हुआ है। अखबार के मुताबिक उर्जित पटेल आजाद भारत के पांचवें ऐसे गवर्नर हैं। पहला मामला 1957 में हुआ था और आखिरी 1992 में। अखबार ने इस खबर के साथ उर्जित पटेल की फोटो और नरेन्द्र मोदी का कोट है, “पटेल एक बेहतरीन विरासत छोड़ कर जा रहे हैं। …. । ” जागरण में उपेन्द्र कुशवाह के इस्तीफे की तीसरी खबर पहले पन्ने पर नहीं है।

इसके मुकाबले दैनिक भास्कर ने पहले पन्ने पर तीनों खबरें तो हैं ही, कुशवाह के इस्तीफे की खबर के साथ यह भी बताया गया है, “11 दल छोड़ चुके हैं एनडीए”। इसके मुताबिक, 2014 के बाद से करीब 11 दल एनडीए छोड़ चुके हैं। इनमें तेलुगुदेशम पार्टी, हरियाणा जनहित कांग्रेस, स्वाभिमानी शेतकारी संगठन, नगालैंड पीपल्स फ्रंट, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा, जनसेना पार्टी, एमडीएमके, डीएमडीके, पीएमके, जेआरएस और आरएलएसपी शामिल हैं। अगप ने भी की धमकी दी है कि नागरिकता बिल पास हुआ तो एनडीए छोड़ देंगे। इसके मुताबिक, असम गण परिषद ने भी सोमवार को एनडीए छोड़ने की धमकी दी। पार्टी के अध्यक्ष अतुल बोरा ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को भेजे पत्र में कहा कि अगर नागरिकता बिल संसद में पास होता है तो उनके पास एनडीए से नाता तोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा। असम भाजपा के अध्यक्ष रंजीत कुमार ने कहा कि इस मुद्दे पर 13 दिसंबर को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में चर्चा की जाएगी।

साभार: वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट।