रवीश कुमार ने लिखा: द टेलीग्राफ ने तो कमाल कर दिया, लीड हेडिंग में केवल क्वेश्चन मार्क! देखें

एक अख़बार यह भी है। कोर्ट इतनी बड़ी ग़लती कैसे कर सकता है? या सरकार से ये ग़लती हुई? कौन सी CAG की रिपोर्ट की बात लिखी है जो पब्लिक अकाउंट कमेटी में जमा हुई? पब्लिक अकाउंट कमेटी को तो क़ीमतों पर सीएजी की किसी रिपोर्ट की जानकारी ही नहीं।

तीन तीन क़ाबिल जजों के फ़ैसले में ऐसी चूक हो सकती है क्या? तीनों ने फ़ैसले की कापी पढ़ने के बाद ही दस्तखत किए होंगे। क्या वाक़ई सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सीएजी की कोई रिपोर्ट दिखाई ? पीएसी में सीएजी ने कौन सी रिपोर्ट दिखाई गई? आप भी फ़ैसले के प्वाइंट नंबर 25 को पढ़िए। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर फ़ैसला मिल जाएगा।

एनडीटीवी के चर्चित वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार की एफबी वॉल से.