ग्रह मंत्रालय की रिपोर्ट से खुलासा: सीमा पर जवानों को साफ पानी तक मयस्‍सर नहीं, सिर्फ 24 फीसदी पोस्‍ट्स को बिजली सप्‍लाई

रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आईटीबीपी की 177 चौकियों में से 24% पर ही बिजली की सप्लाई है, बाकी 76% चौकियों पर जेनरेटर से ही काम चलाना पड़ रहा है।

पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान के साथ जारी तनातनी के कारण हमारी सीमाएं काफी संवेदनशील मानी जाती हैं। ऐसे में सीमाओं की सुरक्षा काफी अहम हो जाती है। लेकिन गृह मंत्रालय द्वारा पेश की गई एक रिपोर्ट में स्थिति बेहद चिंताजनक दिखाई दे रही है। इस रिपोर्ट के अनुसार, चाइना बॉर्डर पर तैनात आईटीबीपी (इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस) की करीब 82% चौकियों (BOP- बॉर्डर आउटपोस्ट चौकियां) पर बेहद ही खराब हालात हैं। इन चौकियों पर जवानों के पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध नहीं है और 40% चौकियों तक सड़कें भी उपलब्ध नहीं हैं। इतना ही नहीं आईटीबीपी की 177 चौकियों में से 24% पर ही बिजली की सप्लाई है, बाकी 76% चौकियों पर जेनरेटर से ही काम चलाना पड़ रहा है।

बता दें कि गृह मंत्रालय की यह रिपोर्ट संसदीय समिति के सामने पेश की गई है। इस संसदीय समिति की अध्यक्षता कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी.चिदंबरम कर रहे हैं और इस समिति में राज्यसभा और लोकसभा के 29 सांसद शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने इस संसदीय समिति के सामने बीते 12 दिसंबर को यह रिपोर्ट पेश की थी। ‘वर्किंग कंडीशन इन बॉर्डर गार्डिंग फोर्सेस’ (असम राइफल्स, सशस्त्र सीमा बल, इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस और बीएसएफ) शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कई चिंताजनक पहलुओं का खुलासा हुआ है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन बॉर्डर पर मुश्किल हालात में तैनात जवानों को पहाड़ियों पर बहने वाले दर्रों और नालों से पीने के पानी का इस्तेमाल करना होता है। मंत्रालय की इस रिपोर्ट पर संसदीय समिति ने चिंता जतायी है और माना है कि दर्रों और नालों में बहने वाला पानी काफी प्रदूषित होता है। संसदीय समिति ने सरकार को तुरंत ही जवानों को पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि चीन ने जहां भारत से लगती अपनी सीमाओं पर सारा बुनियादी ढांचा तैयार कर लिया है, वहीं उसके बरक्स भारतीय सीमाएं अभी भी बुनियादी ढांचे से महरुम है और गृह मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट भारत की सुरक्षा चिंताओं में खासा इजाफा करने वाली कही जा सकती है। हालांकि बीते दिनों में भारत ने भी बॉर्डर के इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास का काम तेज किया है, लेकिन इसमें अभी लंबा वक्त लगेगा और चीन इस मामले में भी हमसे काफी आगे है।