राफेल मामले पर रवीश कुमार का व्यंग्य: सरकार को एक व्याकरण मंत्रालय की ज़रूरत है। ‘हैज बीन’को लोग ‘भैंस के आगे बीन’ समझ लेते हैं।

क्रिएटिव हेडिंग के मामले में टेलीग्राफ अव्वल, देखें सुप्रीम कोर्ट के टाइपिंग एरर वाले मुद्दे पर मुख्य शीर्षक

रवीश कुमार:

मैं टाइप करता गया, एरर होता गया… CAG GAC ACG AGC CGA PAC CAP PCA APC ACP…. IS, WILL, HAS BEEN…. BEEN WILL, IS, HAS, मैं क्या जानूँ रे, जानू तो बस मैं इतना जानू, मैं कुछ ना जानू रे। हुज़ूर की शान में अंग्रेज़ी जो हो ग़लत… ये कौन सी बात है अंग्रेज़ भी थे ग़लत…

भारत सरकार को एक व्याकरण मंत्रालय की ज़रूरत है। ‘हैज बीन’को लोग ‘भैंस के आगे बीन’ समझ लेते हैं। व्याकरण की ग़लतियों के कारण विश्व गुरु की रैंकिंग घट सकती है। जज साहिबान को रेन एंड मार्टिन या नेसफिल्ड ग्रामर की शपथ लेकर फ़ैसला लिखना चाहिए। झूठ और फ़रेब को ग्रामर ही सत्य के क़रीब पहुँचा सकता है।

देर रात सुप्रीम कोर्ट के गलियारे में टहलते हुए व्याकरण पर ही चर्चा हुई होगी। एक ने दूसरे से पूछ लिया होगा कि हैज बिन कब लगता है और इज़ का प्रयोग कब होता है। अब यह पता नहीं चल सका कि इस सवाल से हलक किसका सूखा था। नियति कहीं और ले जा रही है। हम बस चले जा रहे हैं। व्याकरण मंत्री ही हमारे वहाँ तक ले जाए जाने का मार्ग सुगम कर सकता है। बाकी कौन कहता है कि आप समझदार हैं।

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार की एफबी वॉल से.