राफेल मामले पर कांग्रेस ने मोदी सरकार, BJP नेताओं से पूछे यह अहम 11 सवाल, आप भी जानिए!

राफेल सौदे (Rafale Deal) पर कांग्रेस मोदी सरकार (Modi Govt) पर लगातार हमलावर है. कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मोदी सरकार और BJP नेताओं से पूछे 11 सवाल.

राफेल मामले में कांग्रेस शुरुआत से ही मोदी सरकार पर हमलावर है.

Ndtv की खबर के मुताबिक राफेल सौदे (Rafale Deal) पर कांग्रेस मोदी सरकार (Modi Govt) पर लगातार हमलावर है. सुप्रीम कोर्ट से मोदी सरकार को क्लीनचिट मिलने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित पार्टी के बड़े नेता लगातार सरकार पर हमला बोल रहे हैं. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों ने एकमत से अपने फैसले में राफेल सौदे को लेकर सभी याचिकाएं खारिज कर दी और मोदी सरकार को पूरी तरह से क्लीनचिट दे दी है. बता दें कि राफेल पर मोदी सरकार काफी समय से घिरी थी और विपक्ष ने इसे चुनावी हथियार बनाया था. इस बीच मंगलवार को इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला. राफेल डील मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी तो पीएम मोदी सरकार के टाइपो एरर निकलने शुरू हुए हैं. मोदी सरकार के अभी कई और टाइपो एरर निकलेंगे. इस बीच कांग्रेस ने राफेल मामले में कांग्रेस ने मोदी सरकार और बीजेपी नेताओं से 11 सवाल पूछे हैं. कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट किया, राफ़ेल घोटाले में भ्रष्टाचार छिपाने के लिए मोदी सरकार पत्रकार वार्ताओं से एक नई ‘झूठ की फैक्ट्री’ चालू करेगी. इसे कहते है ‘पहले चोरी, फिर सीना ज़ोरी’ हमारी चुनौती, भाजपा के नेता आज इन 11 सवालों का जवाब दें.

राफेल पर घमासान

राफ़ेल पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का आधार CAG रिपोर्ट है (Para 25), पर CAG ने तो कोई रिपोर्ट दी ही नहीं? न ही CAG रिपोर्ट संसद में पेश हुई और न ही PAC में. फिर सुप्रीम कोर्ट के साथ इतना बड़ा फ्रॉड क्यों?

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का दूसरा आधार रिलायंस कंपनी का साल 2012 से ही डसॉल्ट एविएशन से समझौता चला आ रहा था. (Para 32) पर रिलायंस डिफेंस लिमिटेड का तो गठन ही 28 मार्च 2015 को हुआ. फिर सुप्रीम कोर्ट को ये गलत तथ्य दे, बरगलाया क्यों?

SC के निर्णय का तीसरा आधार-राष्ट्रपति, ओलांद का खुलासा गलत है कि मोदी सरकार ने ठेका रिलायंस को दिलाया, जबकि इसे दोनों पक्षों ने नकार दिया पर ओलांद ने 21/9/18 को अपना बयान दोहराया. 27/9/18 को मैक्रों ने कहा-वो ओलांद की बात ख़ारिज नहीं कर सकते. फिर SC से छल क्यों?

SC निर्णय का चौथा आधार-सरकारी कंपनी HAL का राफ़ेल ठेके से कोई सरोकार नहीं (Para 32). पर HAL व डसॉल्ट का समझौता 13/3/2014 को हो चुका था. 25/3/2015 को डसॉल्ट CEO ने बेंगलुरु में इसकी पुष्टि की. 8/4/2015 को विदेश सचिव ने HAL-डसॉल्ट के समझौते को माना, फिर कोर्ट से धोखा क्यों?

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का पांचवा आधार-वादी ने कहा कि फ्रांस द्वारा Sovereign Guarantee न दे मात्र लेटर ऑफ कंफर्ट दिया गया. (Para 20) पर SC ने इसपर कोई फ़ैसला नहीं दिया. 9/12/2015 व 23/8/2016 का क़ानून मंत्रालय का विरोध SC को दिखाया ही नहीं. कोर्ट से क्यों छिपाया?

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का छठा आधार-रक्षा ख़रीद समिति (DAC) की अनुमति के साथ 10/4/2015 को 36 राफ़ेल ख़रीद की घोषणा हुई (Para 3) पर DAC की बैठक तो 13/5/2015 को हुई जहां 36 राफ़ेल खरीदने का निर्णय हुआ. फिर मोदीजी ने 1 महीना पहले फैसला कैसे लिया? फिर SC को गुमराह क्यों किया?

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सातवां आधार-36 राफ़ेल ख़रीद सौदा 23/9/2016 को हुआ पर ओलांद के 21/9/2018 के खुलासे से पहले किसी ने विरोध नहीं किया (Para 23). पर कांग्रेस ने इस घोटाले का भंडाफोड़ 23/5/2015 को ही कर दिया था. फिर सरकार ने SC को सच क्यों नहीं बताया?

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का आठवां आधार-वायुसेना प्रमुख ने राफ़ेल की क़ीमत बताने पर ऐतराज़ जताया (Para 25) पर वायुसेना प्रमुख न तो कोर्ट आये और न ही कोई शपथ पत्र दाख़िल किया. वायुसेना अधिकारियों से क़ीमत के बारे कोई सवाल अदालत में नहीं पुछा गया. फिर कोर्ट को क्यों भटकाया?

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का नौवां आधार-126 राफ़ेल की बजाय मात्र 36 राफ़ेल खरीदने का निर्णय मोदी सरकार का नीतिगत फैसला है (Para 22) पर वायुसेना की 126 जहाज़ों की ज़रूरत ख़ारिज़ कर मनमर्ज़ी से 36 जहाज़ खरीद राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता है. फिर SC को औचित्य क्यों नहीं बताया?

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का दसवां आधार-रक्षा खरीद प्रणाली DPP-2013 के मुताबिक़ बग़ैर सरकारी हस्तक्षेप के डसॉल्ट ऑफसेट पार्टनर चुन सकती थी (Para 33) पर DPP-2013 में इस शर्त को 5/8/2015 को ही जोड़ा गया, जबकि राफ़ेल खरीद की घोषणा 10/4/2015 को हुई थी. SC से विश्वासघात क्यों?

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का ग्यारहवां आधार-मोदी सरकार ने कहा कि 36 राफ़ेल की क़ीमत फ़ायदेमंद सौदा है (Para 26) पर कांग्रेस जो एक राफ़ेल 526 करोड़ रुपये में ख़रीद रही थी, वो मोदीजी ने 1670 करोड़ प्रति जहाज़ ख़रीदा. देश को 41,205 करोड़ का चूना लगा! फ़िर कोर्ट को सच क्यों नहीं बताया?