राफेल डील: मोदी सरकार की अपील में दिए सीएजी की “संशोधित रिपोर्ट” के तथ्य पर विवाद , एक्‍सपर्ट्स ने कहा- ऐसा प्रावधान ही नहीं

“जो भी छिपाना होता है, वह रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पहले किया जाता है। अगर पीएसी रिपोर्ट में छिपाए गए हिस्‍सों के बारे में जानकारी मांगती है तो सीएजी पूरी गोपनीयता के साथ कमेटी के समझने के लिए वह जानकारी साझा करता है।”

सुशांत सिंह

जनसत्ता की खबर के अनुसार राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले के पैरा 25 में कहा कि सौदे पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) रिपोर्ट की “लोक लेखा समिति जांच कर चुकी है” और रिपोर्ट का “एक ‘Redacted’ संशोधित (संवेदनशील माने जाने के बाद संपादित हिस्‍से) रूप संसद के समक्ष रखा गया और सार्वजनिक है।” जब यह साफ हो चुका है कि इस संबंध में सीएजी की कोई रिपोर्ट नहीं आई है और लोक लेखा समिति को कुछ नहीं भेजा गया है, सरकार ने अदालत से इसे दुरुस्‍त करने की दरख्‍वास्‍त की है। केंद्र ने अदालत से कहा कि सीलबंद लिफाफे में जो भी उसके समक्ष रखा गया, वह प्रक्रिया के संबंध में जानकारी थी।

विशेषज्ञों और सीएजी तथा संसद के रिटायर्ड अधिकारियों ने सरकार के इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ एक सीएजी रिपोर्ट होती है और किसी “संशोधित रूप” को सार्वजनिक किए जाने का कोई उदाहरण मौजूद नहीं है। द इंडियन एक्‍सप्रेस से लोकसभा के पूर्व महासचिव पी.डी.टी. आचार्य ने कहा, “सीएजी रिपोर्ट के संशोधन से जुड़ी कोई व्‍यवस्‍था नहीं है, न ही ऐसी कोई नजीर है। संविधान के अंतर्गत, कानून के तहत ऐसी कोई बात नहीं है।” आचार्य ने आगे कहा, “सीएजी की ओर से जो भी रिपोर्ट्स आती हैं, उन्‍हें संसद के समक्ष पेश किया जाता है और फिर वह पीएसी के पास जाती हैं। वित्‍त मंत्री रिपोर्ट्स को सदन के पटल पर रखते हैं। सीएजी, पीएसी की मदद करते हैं, असल में सीएजी को पीएसी सेटअप का हिस्‍सा कहा जा सकता है।”

पूर्व डिप्‍टी सीएजी डॉ बी.पी. माथुर ने कहा, “मैंने पहले कभी Redaction शब्‍द नहीं सुना। केवल एक सीएजी रिपोर्ट होती है जो कि ऑडिटर्स पूरी लगन से तैयार करते हैं, डिप्‍टी सीएजी उसे देखते हैं और निजी तौर पर सीएजी स्‍वीकृत करते हैं। एक बार संसद के सामने पेश होने के बाद, यह रिपोर्ट एक सार्वजनिक दस्‍तावेज बन जाती है।” माथुर ने कहा, ”सीएजी की ड्राफ्ट रिपोर्ट गोपनीय होती है और सरकार से साझा की जाती है। सरकार के जवाब अंतिम रिपोर्ट में शामिल किए जाते हैं। संसद को भेजी जाने वाली कई अंतिम रिपोर्ट्स में देशों के नाम और हथियारों के प्रकार व संख्‍या को राष्‍ट्रीय सुरक्षा के चलते छिपा लिए जाते हैं।”

पीआरएस लेजिस्‍लेटिव रिसर्च के चक्षु रॉय ने कहा, “संविधान कहता है कि सीएजी की रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखी जाएंगी। लोकसभा की कार्यवाही के नियम कहते हैं कि पटल पर रखे गए सभी दस्‍तावेज और कागज सार्वजनिक माने जाएंगे।” लोकसभा के एक और पूर्व महासचिव ने गोपनीयता की शर्त पर द इंडियन एक्‍सप्रेस से कहा, “Redaction अभी तक तो नहीं हुआ, यह शब्‍द व्‍यवस्‍था के लिए नया है। शायद आप भविष्‍य में Redactions देखें।”

पीएसी से बतौर अधिकारी 11 साल तक जुड़े रहे लोकसभा के पूर्व एडिशनल सेक्रेट्री देवेंद्र सिंह ने कहा, “पीएसी सीएजी की मदद से रिपोर्ट की जांच करती है, उन पैराग्राफ्स का निर्धारण करती है जिसके बारे में सरकार से जवाब चाहिए होता है और विभिन्‍न व्‍यक्तियों को अपने समक्ष पेश होने को कहती है। सीएजी के अवलोकन पर पीएसी की रिपोर्ट्स संसद में पेश की जाती हैं। यह एक बहुत लंबी और विस्तृत प्रक्रिया है।”

हाल ही में रिटायर हुए एक सीएजी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, “जो भी छिपाना होता है, वह रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पहले किया जाता है। अगर पीएसी रिपोर्ट में छिपाए गए हिस्‍सों के बारे में सीएजी से जानकारी मांगती है तो सीएजी पूरी गोपनीयता के साथ कमेटी के समझने के लिए वह जानकारी साझा करता है।” राष्‍ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सीएजी अपनी वेबसाइट पर वह रिपोर्ट्स नहीं जारी करता, हालांकि उनकी हार्ड कॉपी संसद में पेश की जाती हैं।