सर्वे: नौकरियां और लघु उद्योगों का मुनाफा घटा, नोटबंदी और जीएसटी जिम्‍मेदार

2015-16 में नई सरकार के आने के चलते कारोबार में बढ़ोतरी देखी गई। मगर अगले ही साल नोटबंदी की वजह से कारोबार में गिरावट आ गई। जीएसटी की वजह से व्यापार और खराब हुआ।

देश भर में ट्रेडर्स एंड माइक्रो स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज (MSME) ने साल 2014 से लगातार नौकरी में कमी और लगातार मुनाफे में गिरावट की सूचना दी है। इसकी वजह नोटबंदी और जीएसटी के कारणों में से एक बताया गया है। ऑल इंडिया मेनुफेक्चर ऑर्गेनाइजेशन (AIMO) ने अपने नए सर्व में यह जानकारी दी है। AIMO, जिसने व्यापारियों और MSME के 34,700 सैंपल का सर्वे किया, के मुताबिक साल 2014 के बाद विभिन्न क्षेत्रों के व्यापारियों को अपने क्षेत्र में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। AIMO विनिर्माण और निर्यात में लगे 3 लाख से अधिक सूक्ष्म, छोटे, और मध्यम और बड़े पैमाने पर उद्योगों का प्रतिनिधित्व करता है।

रिपोर्ट में व्यापार खंड में 43 फीसदी की दर से नौकरी की कमी की सूचना मिली, माइक्रो-सेगमेंट में 32 फीसदी की दर से नौकरी का नुकसान होने की सूचना दी गई, छोटे सेगमेंट में 35 फीसदी की रिपोर्ट दी और मध्यम उद्योगों ने 24 फीसदी नौकरी के नुकसान की सूचना दी। सर्वे के मुताबिक AIMO ने व्यापारियों और MSME की खराब हालत दिखाने के लिए लाल झंडे दिखाए, साथ ही कहा कि इस क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए ‘बहुत अधिक गंभीरता और तात्कालिकता के साथ’ ध्यान देने की आवश्यकता के लिए केंद्र को एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करना चाहिए।

AIMO के अध्यक्ष केई रघुनाथ ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सर्वे से साफ पता चलता है कि 2014 के बाद से व्यापारियों के परिचालन मुनाफे में 70 फीसदी की कमी आई है। उन्होंने कहा, ‘सूक्ष्म उद्योग में 43 फीसदी परिचालन मुनाफे में कमी आई है। छोटे पैमाने पर उद्योगों में 35 फीसदी तो मध्यम उद्योगों में 24 फीसदी की कमी आई। यह बहुत ज्यादा है। इन सेक्टर्स में तत्कान ध्यान देने की जरुरत है।’

रघुनाथ ने आगे बताया, ‘2015-16 में नई सरकार के आने के चलते कारोबार में बढ़ोतरी देखी गई। मगर अगले ही साल नोटबंदी की वजह से कारोबार में गिरावट आ गई। जीएसटी की वजह से व्यापार और खराब हुआ। बता दें कि सर्वे के लिए करीब 34,000 व्यापारियों, विनिर्माण, सर्विस एंड एक्सपोर्ट सेक्टर, पेशेवर और व्यापार निकाय से बात की गई। इसमें खासतौर पर पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हैदराबाद, असम, पश्चिम बंगाल और केरल के लोगों से बात की गई।

साभार: जनसत्ता