सीआईसी ने आरबीआई से पूछा: नोटबंदी के दौरान 2000 और 500 के कितने नोट छापे गए, 4 सप्ताह में मांगा जवाब

केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने आरबीआई से यह बताने को कहा कि 9 नवंबर से 30 नवंबर 2016 के बीच जब नोटबंदी लागू था, हर दिन 500 और 2000 के कितने नोटों की छपाई की गई।

हिंदी लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक सूचना आयुक्त सुधीर भार्गव ने कहा कि आरबीआई के केंद्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) यह बताने में विफल रहे हैं कि कैसे यह सूचना देने से देश का आर्थिक हित प्रतिकूल रूप से प्रभावित होगा।

आयोग का कहना है, “यह सूचना कि करेंसी नोट छापने के बारे में जो सूचना माँगी गई है वह इतना संवेदनशील नहीं है आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(a) के तहत छूट की बात इस पर लागू हो क्योंकि यह बीती हुई घटना है और यह नहीं कहा जा सकता कि इसके बारे में बताने से नोट छापने के बारे में अन्य नहीं घोषित की जाने वाली सूचनाओं जैसे कच्चा माल, मुद्रण, भंडारण और इसकी ढुलाई के बारे में भी बताना पड़ेगा।”

इसलिए आयोग ने आरबीआई से कहा है कि वह इस बारे में चार सप्ताह के भीतर जानकारी उपलब्ध कराए।

सीआईसी हरिंदर ढींगरा की अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। आरबीआई ने ढींगरा द्वारा माँगी गई जानकारी देने से मना कर दिया है।

आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(a) के तहत यह सूचना देने से मना कर दिया गया है। यह सूचना नहीं देने को लेकर जो दलील दी गई है वह इस तरह से है, “इससे देश की संप्रभुता और अखंडता पर असर पड़ेगा, राज्य की सुरक्षा, रणनीतिक, वैज्ञानिक या आर्थिक हितों, विदेशी राज्यों से उसके संबंध या किसी अपराध को लेकर उत्तेजना भड़क सकती है।”

हालाँकि सीआईसी ने कहा कि आरबीआई का सीपीआईओ यह बताने में विफल रहा है कि माँगी गई सूचना देने से किस तरह से देश की संप्रभुता और अखंडता पर असर पड़ेगा।

सीआईसी ने याचिकाकर्ता की अपील स्वीकार कर ली है और आरबीआई के सीपीआईओ को वांछित सूचना उपलब्ध कराने को कहा है। साभार: livelaw