गंभीर बीमारियों के इलाज की खातिर केंद्र सरकार ने बनाया था फंड! अब मुकर गई

प्रीतम पाल सिंह

हलफनामे में सरकार ने बताया था कि ‘गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए सरकार ने नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अन्तर्गत 100 करोड़ रुपए का फंड बनाया है।’

केन्द्र सरकार द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के सामने गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 100 करोड़ रुपए का एक फंड बनाने की बात कही गई थी। लेकिन अब सरकार ने हाईकोर्ट में दिए अपने हलफनामे में ऐसे किसी भी फंड के होने से इंकार किया है। दरअसल गंभीर बीमारियों से पीड़ित तीन बच्चों के परिजनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपने वकील अशोक अग्रवाल की मदद से एक याचिका डाली है। इस याचिका में कहा गया है कि ‘संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत कर्मचारी राज्य बीमा एक्ट में ESI का यह दायित्व है कि देश के प्रत्येक नागरिक को अपना जीवन गरिमा के साथ जीने का अधिकार मिले।’ इस याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार का पक्ष पूछा तो केन्द्र सरकार ने 14 मार्च, 2018 को एक हलफनामा दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल किया था।

इस हलफनामे में सरकार ने बताया था कि ‘गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए सरकार ने नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के अन्तर्गत 100 करोड़ रुपए का फंड बनाया है।’ कोर्ट ने जब सरकार से इस पॉलिसी की जानकारी देने को कहा तो अब सरकार ने ऐसे किसी भी फंड के प्रभाव में आने से इंकार किया है। केन्द्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के सामने स्वीकार किया कि ‘इस तरह का कोई फंड अभी तक नहीं बनाया गया है।’ स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय ने जस्टिस मनमोहन की बेंच के सामने कहा कि “इस बात का आभास होने के बाद कि स्वास्थ्य राज्य सरकार का विषय है। इसलिए अब यह फैसला किया गया है कि इस पॉलिसी पर दोबारा से विचार किया जाएगा।”

केन्द्र सरकार की वकील शिवा लक्ष्मी द्वारा कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में कहा गया है कि “इस पॉलिसी को नेशनल हेल्थ मिशन के अन्तर्गत लागू किया जाना था। लेकिन नेशनल हेल्थ मिशन मरीज की सिर्फ प्राइमरी और सेकेंडरी देखभाल को कवर करता है और इसमें थर्ड लेवल की देखभाल कवर नहीं होती है। गंभीर बीमारियां इसी थर्ड लेवल के अन्तर्गत आती हैं।”

सरकार के हलफनामे में स्वीकार किया गया है कि “सरकार को गलत विश्वास के कारण लगा कि नेशनल हेल्थ मिशन के अन्तर्गत ऐसे किसी फंड का गठन किया जा सकता है।” स्वास्थ्य मंत्रालय के हलफनामे में यह भी कहा गया है कि क्योंकि स्वास्थ्य राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है, ऐसे में राज्य सरकारों से बातचीत के बाद इस फंड का गठन नहीं हो सका। दरअसल अधिकतर राज्यों ने स्टेट टेक्नीकल कमेटी का गठन ही नहीं किया, जो कि नेशनल हेल्थ मिशन की नीति के तहत जरुरी था। सिर्फ 6 राज्यों दिल्ली, कर्नाटक, पंजाब, गुजरात और झारखंड, तमिलनाडु द्वारा ही स्टेट टेक्नीकल कमेटी का गठन किया गया। ऐसे में ऐसे किसी भी फंड का गठन नेशनल हेल्थ स्कीम के तहत नहीं हो सका।

साभार: जनसत्ता