68500 शिक्षक भर्ती मामला: ‘2 महीने में पुनर्मूल्यांकन वरना नई भर्ती में शामिल नहीं होंगे बचे पद’

याची का आरोप था कि उसे स्कैन कॉपी नहीं दी गई. उसे सही जवाब देने के बावजूद अंक नहीं दिये गये हैं, इसलिए 5 अक्टूबर 2018 के शासनादेश के तहत उसकी कापियों का पुनर्मूल्यांकन किया जाये.

उत्तर प्रदेश में 68500 सहायक अध्यापक भर्ती-2018 में कापियों के पुनर्मूल्यांकन मामले में बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि पुनर्मूल्यांकन दो माह में पूरा कर लिया जाएगा. अगर पुनर्मूल्यांकन पूरा नहीं हो सका तो बचे पदों को नई भर्ती में शामिल नहीं किया जाएगा.

बता दें मामले में रावेन्द्र सिंह ने याचिका दाखिल की है. कोर्ट ने सचिव को अनिरूद्ध नारायण शुक्ल की याचिका पर पारित आदेश के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया. याची का आरोप था कि उसे स्कैन कॉपी नहीं दी गई. उसे सही जवाब देने के बावजूद अंक नहीं दिये गये हैं, इसलिए 5 अक्टूबर 2018 के शासनादेश के तहत उसकी कापियों का पुनर्मूल्यांकन किया जाये.

कोर्ट ने कहा कि कई याचियों ने याचिका लंबित रहने के कारण समय रहते पुनर्मूल्यांकन की अर्जी नहीं दी, ऐसे में उन्हें भी मौका दिया गया है. जस्टिस अजित कुमार की एकलपीठ ने याचिका निस्तारित की.

कॉपी पुनर्मूल्यांकन से बच रहे सचिव परीक्षा नियामक

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद दो महीने से नहीं जांची जा रहीं कॉपियां
30 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने किया है पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद 68500 शिक्षकों भर्ती की कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन से सचिव परीक्षा नियामक बच रहे हैं। हालांकि, उनका कहना है कि कॉपियां एससीईआरटी को जांचने के लिए भेज दी गईं हैं, लेकिन परीक्षार्थी उनके इस तथ्य से संतुष्ट नहीं हैं। वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि वे दो महीने से परीक्षा नियामक कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। आरोप लगाया कि पहली बार में कॉपियों के मूल्यांकन के दौरान विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए पुनर्मूल्यांकन में देरी की जा रही है, ताकि उनको बचाया जा सके।

68500 शिक्षक भर्ती में परिणाम आने के बाद परीक्षार्थियों ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया था। आरोप लगाने वाले अभ्यर्थियों की याचिका पर जब कोर्ट में कॉपी तलब हुई तो पता चला कि मूल्यांकन में गड़बड़ी की गई है। कॉपियों के मूल्यांकन में गड़बड़ी और अंक चढ़ाने में हुए हेरफेर को देखते हुए कोर्ट ने आवेदन करने वाले सभी परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं को दोबारा जांचने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश से पहले ही लगभग 2700 परीक्षार्थियों ने कॉपियों के दोबारा मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था, जबकि आदेश के बाद लगभग 30 हजार ने पुनर्मूल्यांकन के लिए अर्जी दी। दो महीने बीत गए लेकिन पुनर्मूल्यांकन नहीं हुआ। आवेदन करने वाले परीक्षार्थियों का कहना है कि सचिव परीक्षा नियामक उन्हें आश्वासन दे रहे थे कि टीईटी-2018 की परीक्षा के बाद उनके आवेदन पर विचार किया जाएगा, लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई। इस संबंध में सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी अनिल भूषण चतुर्वेदी का कहना है कि दोबारा मूल्यांकन के लिए आवेदन करने वाले परीक्षार्थियों की कॉपी निदेशक एससीईआरटी कार्यालय को भेज दी गई है। अब वहां से कापियों का मूल्यांकन पूरा होने के बाद उसे परीक्षार्थियों को दिखाया जाएगा।