मोदी सरकार ने फिर छिपाए ‘राजन सूची’ में शामिल ‘घोटालेबाज़ों’ के नाम, शशि थरूर के सवाल पर दिया गोलमोल जवाब

मोदी सरकार ने एक बार फिर उस सूची में शामिल नामों को बताने से इनकार कर दिया जो आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन द्वारा सौंपी गई सूची में थे। रघुराम राजन ने 2015 में मोदी सरकार को एक पत्र देकर बैंकों में घोटाला करने वालों की सूची सौंपी थी।

नवजीवन की खबर के अनुसार आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन की वह सूची मोदी सरकार के गले की फांस बनी हुई है जिसमें राजन ने बैंकों के जिन बड़े घोटालों और घोटाला करने वालों के नाम शामिल किए थे और सरकार से उनके खिलाफ आपराधिक जांच कराने का अनुरोध किया था। मोदी सरकार लगातार इस बारे में जानकारी देने से बचती रही है कि इस सूची में किन लोगों के नाम थे और उनके खिलाफ क्या कार्यवाही की गई।

रघुराम राजन ने संसद की आंकलन समिति के सामने कहा था कि उन्होंने घोटालेबाज़ों की सूची सरकार को भेजी थी। 5 फरवरी 2015 के पत्र में रघुराम राजन ने प्रधानमंत्री कार्यालय को इससे अवगत कराया था। लेकिन मोदी सरकार लगातार आंकलन समिति द्वारा मांगी गई सूचनाओं को देने से इनकार करती रही है, जबकि समिति ने सरकार को इस बारे में तीन बार आग्रह किया। यहां तक कि केंद्रीय सूचना आयोग ने भी इस बारे में सरकार से जानकारी मांगी थी। और अब सरकार ने संसद में पूछे गए विशेष प्रश्न के जवाब में भी यह जानकारी देने से इनकार कर दिया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने सरकार से इस बारे में लिखित सवाल पूछा था कि रघुराम राजन की सूची में किन लोगों या संस्थाओं या फिर कंपनियों के नाम थे और सरकार ने किन तारीखो में इन घोटालेबाज़ों के खिलाफ तुरंत सीबीआई से या किसी अन्य एजेंसी से जांच कराने का आदेश दिया।

शशि थरूर ने पूछा था कि:

क्या सरकार को आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कोई ऐसी सूची सौंपी थी जिसमें बैंकों में घोटाला करने वालों के नाम थे?
अगर ऐसा था तो यह जानकारी दी जाए कि किस तारीख को यह सूची सरकार के भेजी गई और इनमें किन लोगों, कंपनियों या संस्थाओं के नाम थे?
क्या सरकार ने इन लोगों या संस्थाओं और कंपनियों के खिलाफ सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी से तुरंत जांच कराने का कब आदेश दिया?

अगर ऐसा नहीं किया गया, तो इसका क्या कारण था?
शशि थरूर के सवाल पर सरकार ने 14 दिसंबर को जवाब दिया है। करीब साढ़े पांच सौ शब्दों के जवाब में सरकार ने बहुत चतुराई के साथ कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया। न तो किसी नाम बताया गया और न ही कुछ और।

यूं तो शशि थरूर ने सवाल सीधे प्रधानमंत्री से पूछा था, लेकिन लोकसभा सचिवालय ने इसे वित्त मंत्रालय को प्रेषित किया। शशि थरूर के सवालों के जवाब में वित्त राज्य मंत्री ने छोटा सा जवाब दे दिया। जवाब में लिखा गया कि, “तत्कालीन आरबीआई गवर्नर ने फरवरी 2015 में सरकार को बैंकों के घोटाले के बारे में लिखा था। पूर्व गवर्नर द्वारा दिए गए सभी मामलों में सीबीआई / प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केस रजिस्टर किए हैं।”

इसके बाद जवाब में बताया गया है कि मोदी सरकार ने बैंकों के एनपीए और बैंकों के घोटाले के संबंध में क्या-क्या कदम उठाए हैं। लेकिन जो विशेष जानकारी मांगी गई थी, उसे सरकार चतुराई से छिपा ले गई है।

गौरतलब है कि अगर किसी भी बैंक घोटाले के संबंध में कोई मामला दर्ज हुआ है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक हो ही जाती है और सरकार को इसे बताने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। चूंकि शशि थरूर को दिए जवाब में वित्त राज्यमंत्री ने माना है कि केस दर्ज किए गए हैं, तो सरकार को इन मामलों के बारे में भी जानकारी देनी चाहिए।

द वायर की एक खबर के मुताबिक एक अनुमान के मुताबिक राजन की सूची में कम से कम 22 लोगों के नाम हैं जो प्रधानमंत्री कार्यालय को दिए गए थे, इनमें से कई उद्योगपति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के नज़दीकी माने जाते हैं। लेकिन सवाल है कि आखिर प्रधानमंत्री कार्यालय इस बारे में पूछे गए सवालों के जवाब देने में क्यों हिचकिचा रहा है।