झारखंड: राज्य के 6466 मिडिल स्कूल्स बंद किये जायेंगे, विरोध शुरू

झारखंड सरकार के इस फैसले की आलोचना भी हो रही है।

झारखंड सरकार ने हाल ही में राज्य के 4600 प्राइमरी स्कूलों को हाईस्कूल्स के साथ विलय करने की घोषणा की थी। अब खबर आयी है कि झारखंड सरकार राज्य के 6466 मिडिल स्कूल्स को बंद करने जा रही है। सरकार के इस फैसले के पीछे का कारण इन स्कूलों में छात्रों की संख्या 100 से भी कम होना बताया जा रहा है। हालांकि सरकार के इस फैसले का विरोध भी शुरु हो गया है। बता दें कि मीडिल स्कूल्स को बंद करने के फैसले से पहले झारखंड सरकार ने 50 से कम छात्रों की संख्या वाले स्कूलों को इलाके के ही हाईस्कूल्स में विलय करने का फैसला किया था। इन स्कूलों का विलय करने की प्रक्रिया शुरु कर दी गई है।

झारखंड के शिक्षा सचिव एपी सिंह का कहना है कि “स्कूलों के विलय का फैसला छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैय्या कराने के उद्देश्य किया गया है। झारखंड में करीब 411 ऐसे मिडिल स्कूल्स हैं, जहां छात्रों की संख्या 10 से भी कम है, यदि ऐसे स्कूल्स का विलय हाईस्कूल्स में किया जाता है तो छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी।” एपी सिंह के अनुसार, “शिक्षा के अधिकार कानून के तहत एक मिडिल स्कूल में जिसमें 100 से कम छात्र हों, वहां कम से कम 3 ट्रेन्ड ग्रेजुएट टीचर होने जरुरी हैं। लेकिन जिन स्कूलों में 10 से भी कम छात्र हैं, वहां भी 3 टीचर्स का होना लॉजिकल नहीं है।”

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, झारखंड एजुकेशन प्रोजेक्ट काउंसिल के अधिकारियों के अनुसार, मीडिल स्कूल्स का हाईस्कूल्स में विलय 5 किलोमीटर के रेडियस में ही किया जाएगा। छात्रों को आने-जाने में कोई परेशानी ना हो, इसके लिए सरकार छात्रों को साइकिल भी देने पर विचार कर रही है। जेईपीसी के अधिकारियों के अनुसार, साल 2016-17 में राज्य के शिक्षा विभाग के अन्तर्गत में 39,600 स्कूल थे। जिनमें से 18,000में 60 या उससे भी कम छात्र थे। इन स्कूलों में एक या दो अध्यापक पढ़ा रहे हैं। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैय्या कराना चुनौती साबित हो रहा था। अधिकारियों के अनुसार, 4600 प्राइमरी स्कूल्स के 98% छात्रों को शिफ्ट कर दिया गया है, जिनमें से 96% ने संतोष जाहिर किया है।