आरटीआई से खुलासा: पीएम मोदी की 48 विदेश यात्राओं पर खर्च हुए थे 2,021.58 करोड़, 4 साल में मंत्रियों ने खर्चे 239 करोड़

आरटीई के मुताबिक विदेश यात्राओं के संबंध में मंत्रियों पर किए गए खर्च का आंकड़ा लगातार कम हुआ है। 2014-15 में 90.88 करोड़ रुपये खर्च हुए (इसमें पूर्व की यूपीए सरकार का भी खर्च शामिल है।) तो वहीं 2015-16 में यह आंकड़ा घटकर 80.51 करोड़ रुपये का रहा। 2016-17 में यह आंकड़ा घटकर आधा यानी 40.02 करोड़ रुपये हो गया। केंद्रीय मंत्रियों की विदेश यात्राओं का खर्च पीएम मोदी से 8 गुना कम है.

जनसत्ता ऑनलाइन के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्र सरकार के मंत्रियों की विदेश यात्राओं का लेखा-जोखा सामने आ गया है। इंडियन एक्सप्रेस ने आरटीआई के हवाले से बताया है कि बीते चार सालों में मंत्रियों की विदेश यात्राओं के खर्च में लगातार कमी आई है। पिछले 4 सालों में मोदी सरकार के मंत्रियों ने अपनी विदेश यात्राओं पर कुल 239.05 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। एक आरटीआई की जवाब में बताया गया कि 1 अप्रैल, 2014 से लेकर 31 मार्च 2018 तक 225.30 करोड़ रुपये कैबिनेट मंत्रियों की विदेश यात्राओं पर खर्च हुए, जबकि 13.75 करोड़ रुपये केंद्रीय राज्य-मंत्रियों के ऊपर खर्च किए गए। गौरतलब है कि वर्तमान मंत्रिमंडल में 25 कैबिनेट मंत्री और 11 स्वतंत्र प्रभार समेत 45 राज्यमंत्री हैं।

आरटीई से मिली जानकारी से पता चलता है कि विदेश यात्राओं के संबंध में मंत्रियों पर किए गए खर्च का आंकड़ा लगातार कम हुआ है। 2014-15 में 90.88 करोड़ रुपये खर्च हुए (इसमें पूर्व की यूपीए सरकार का भी खर्च शामिल है।) तो वहीं 2015-16 में यह आंकड़ा घटकर 80.51 करोड़ रुपये का रहा। 2016-17 में यह आंकड़ा घटकर आधा यानी 40.02 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, 2017-2018 में आकर केंद्रीय एवं राज्यमंत्रियों की विदेश यात्राओं का खर्च 26.64 करोड़ रुपये रहा।

हालांकि, इस संदर्भ में पीएम मोदी की विदेश यात्राओं का खर्च काफी ज्यादा है। 13 दिसंबर को राज्यसभा में विदेश मामलों के राज्यमंत्री वीके सिंह ने बताया कि बीते 4 सालों में प्रधानमंत्री के विदेश यात्राओं का कुल खर्च 2,021 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कुल 48 विदेश यात्राएं कीं। इस खर्च में उनके विमान के रख-रखाव, चार्टर्ड फ्लाइट और सुरक्षित हॉटलाइन शामिल थे। वीके सिंह ने सदन को बताया कि पीएम की विदेश यात्राओं का उद्देश्य दुनिया के तमाम देशों के साथ बेहतर निजी एवं व्यापारिक संबंध स्थापित करना था।