TET 2017: योगी सरकार के निर्णय से हाईकोर्ट खफा, 41 हजार शिक्षकों की नोकरी खतरे में! 69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा पर भी संशय

रबीअ बहार

यूपीटेट-2017 का निस्तारण कराए बिना उत्तर प्रदेश सरकार नही आयोजित कर सकेगी शिक्षक भर्ती परीक्षा-हाई कोर्ट

योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के टेट 2017 के पारित आदेश को अनदेखा करते हुए 68500 और 69000 शिक्षकों की भर्ती शुरू कर दी। जब ये मामला शुक्रवार को हाई कोर्ट में सुनवाई पर लगा तो हाईकोर्ट ये जान कर बहुत नाराज हुआ। कोर्ट ने पूछा कि पिछले 3 महीने में आप ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन क्यो नहीं किया। इस सवाल का सरकार के पास कोई जवाब नही था। यहां सरकार तकनीकी तौर पर फंस चुकी है क्योंकि 90 दिन में एकल पीठ के आदेश को लागू करना था या इस दौरान उसे डबल बेंच से रद्द करवाना था। लेकिन सरकार ने न तो एकल पीठ के आदेश को पिछले 3 माह में चुनौती ही दी और न ही उसे लागू मानते हुए टेट 2017 का परीक्षा परिणाम संशोधित किया।

टेट 2017 का संशोधित परीक्षा परिणाम जारी होने की स्थिति 68500 शिक्षक भर्ती में चयनित हज़ारों शिक्षकों की नोकरी जाना तय है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मंगलवार को योगी सरकार की बड़ी कमी की ओर इशारा करते हुए आइना दिखाया है. हाईकोर्ट ने बिना पुर्नमूल्यांकन कर टीईटी 2017 का परीक्षा परिणाम घोषित किये यूपी 69 हजार सहायक शिक्षकें की भर्ती शुरू करने के सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई है. हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि राज्य सरकार को सावधानी से कार्य करना चाहिए था. याचियों सहित बड़ी संख्या में शिक्षामित्र इससे प्रभावित होंगे और उन्हें सहायक शिक्षक बनने का अवसर नहीं मिल पायेगा.

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2017 के अनुक्रम में कोर्ट कतई ये सहन नही कर सकती है कि सरकार याचियों/शिक्षामित्रों के प्रति इतना निर्दयी रवैया अपनाए। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सिर्फ 2 मौके दिए।

हाईकोर्ट ने मामले में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 के कहा था कि शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बनने का अवसर दिया जायेगा. सहायक शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास होना जरूरी है.

लेकिन इस मामले में सिंगल बेंच ने 6 मार्च 2018 के टीईटी-2017 में प्रश्नों में गड़बड़ियां पाते हुए 14 प्रश्नों को हटाकर नए सिरे से परिणाम घोषित करने का आदेश दिया था. अगर बिना उस परीक्षा को परिणाम घोषित करने से एक अवसर खो चुके याचीगण और उनकी तरह के तमाम शिक्षामित्र दूसरा अवसर भी खो देंगे. हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 2 जनवरी को नियत करते हुए सरकार को इस प्रकरण में अपना पूरा पक्ष रखने का आदेश दिया है.

जस्टिस डीके उपध्य्याय और जस्टिस एआर मसूदी की बेंच ने ये आदेश श्रीकांत सहित 6 शिक्षामित्रों की ओर से दाखिल विशेष अपील पर सुनवायी करते हुए पारित किया है. कोर्ट का कहना है कि 02 जनवरी की सुनवाई में सरकार इस मामले को ये कहकर कतई नही टाल सकेगी कि 06 जनवरी की परीक्षा की व्यस्तता के कारण वो इस टेट 2017 के मामले को अभी पेंडिंग में रखेगी। यदि सरकार ऐसी हीलाहवाली करती है तो याचियों को कोर्ट निश्चित तौर अंतरिम रिलीफ देगा।

इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच ने 17 अप्रैल 2018 को आदेश पारित किया. जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर हुई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर 2018 के हाईकोर्ट द्वारा विशेष अपील में पारित आदेश को रद्द कर कहा कि याचीगणों के विशेष अपील में पक्षकार बनाया जाये. साथ ही कहा कि 9 जनवरी 2018 के राज्य सरकार द्वारा प्रारम्भ की भर्ती प्रकिया के अनुसरण में की गयी नियुक्तियां विशेष अपील के अंतिम आदेशों के आधीन रहेंगीं. कहा गया कि अभी तक याचीगण को विशेप अपील में पक्षकार बनाने के सरकार की ओर से अर्जी तक दाखिल नहीं की गयी है.

69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा 6 जनवरी 2019 को होनी है, जिसके चलते कोर्ट ने सुनवायी 2 जनवरी को ही लगा दी है.