स्‍मार्ट सिटी मिशन का हाल: आधे से ज्‍यादा शहर तीन साल में 50% फंड भी नहीं कर सके इस्‍तेमाल

सूची में जिन शहरों का प्रदर्शन खराब रहा है, उनमें गुवाहटी, लुधियाना, बेलगावी, दावनगेरे, सोलापुर, उदयपुर, दिल्ली का एनडीएमसी, जयपुर और पुणे जैसे शहरों का नाम शामिल है। जनसत्ता ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक कई शहर, स्मार्ट सिटी योजना के तहत फंड खर्च ही नहीं कर सके हैं।

साल 2016 में केन्द्र की भाजपा सरकार ने देश के शहरों को आधुनिक और साफ-सुथरा बनाने के लिए एक महत्वकांक्षी योजना “स्मार्ट सिटी मिशन” की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत सरकार ने विभिन्न राज्यों से करीब 20 शहरों का चुनाव किया था। सरकार ने इस योजना के तहत चुने गए प्रत्येक शहर के लिए भारी बजट का ऐलान किया था। लेकिन सामने आयी एक रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्ट सिटी योजना के तहत चुने गए 20 शहरों में से आधे शहरों ने भी आवंटित फंड में से पिछले तीन सालों के दौरान 50% फंड का भी इस्तेमाल नहीं किया है। इस सूची में जिन शहरों का प्रदर्शन खराब रहा है, उनमें गुवाहटी, लुधियाना, बेलगावी, दावनगेरे, सोलापुर, उदयपुर, दिल्ली का एनडीएमसी, जयपुर और पुणे जैसे शहरों का नाम शामिल है। इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सूरत, काकिनाडा, इंदौर, अहमदाबाद जैसे शहर फंड इस्तेमाल करने में सबसे आगे रहे हैं।

केन्द्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, सूरत ने आवंटित फंड में से 99.9% रकम खर्च कर सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। इसके बाद काकिनाडा ने 99.3% और इंदौर 97.2% फंड खर्च कर चुके हैं। हालांकि शहरी विकास मंत्रालय का ऐसा नहीं मानना है कि स्मार्ट सिटी मिशन में देरी हो रही है। स्मार्ट सिटी मिशन के निदेशक कुणाल कुमार ने इकोनोमिक टाइम्स के साथ बातचीत में बताया कि स्मार्ट सिटी का कॉन्सेप्ट नया है। इसके पहले बैच का ऐलान जनवरी, 2016 में किया गया था। प्रोजेक्ट के क्रियान्वन की तैयारियों के लिए ही शहरों को 12-18 माह का वक्त लग गया था। अब किसी नए इंस्टीट्यूशन से तुरंत ही बेहतर रिजल्ट की अपेक्षा करना तर्कसंगत नहीं है।

मंत्रालय ने स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत विभिन्न शहरों के प्रदर्शन में अंतर का कारण बताते हुए बताया कि “सूरत, भोपाल, विशाखापत्तनम और पुणे जैसे शहरों के म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन पुराने हैं। जिसके चलते वहां काम ज्यादा तेजी से हो रहे हैं। वहीं कुछ शहरों में स्मार्ट सिटी योजना के तहत हो रहे धीमे कामों का कारण वहां की राज्य सरकार द्वारा अपने हिस्से का फंड नहीं दिया जाना भी है। अपनी बात समझाते हुए मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन एक बड़ा इंस्टीट्यूट है, जिसका सालाना बजट 5000-6000 करोड़ है और इसके काम करने का एक सिस्टम है। वहीं गुवाहटी, लुधियाना जैसे शहरों में छोटे म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन हैं, जिनमें श्रमशक्ति की भी कमी भी है।”

रिपोर्ट के अनुसार जिन शहरों ने फंड खर्च करने के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनमें सूरत, काकिनाडा, इंदौर के अलावा अहमदाबाद, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, चेन्नई, भोपाल शामिल हैं। वहीं 50% से कम फंड खर्च करने वाले शहरों में गुवाहटी, कोच्चि, लुधियाना, बेलगावी, दावनगेरे, सोलापुर, उदयपुर, एनडीएमसी, जयपुर, पुणे का नाम शामिल है।