यूपी सरकार पर इलाहाबाद हाई कोर्ट तल्ख, पूछा- क्या लोकायुक्त का अपमान कर रही योगी सरकार?

जनवरी 2016 को लोकायुक्त संजय मिश्रा को टाइप-IV बंगला एलॉट किया गया था। लेकिन, 2017 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद यह परिस्थिति बदल गई। 3 दिसंबर, 2017 को योगी सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया और लोकायुक्त के बंगले का ग्रेड कम करके उसे टाइप-V कर दिया। जबकि, इस संदर्भ में राज्य के एडवोकेट जनरल ने इसे कानूनी रूप से गलत करार दिया था। जनसत्ता ऑनलाइन की खबर के मुताबिक लोकायुक्त आवास मामले में हाई कोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाई है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के खिलाफ गहरी नाराजगी जाहिर की है। राज्य सरकार द्वारा लोकायुक्त को उनके पद के हिसाब से नीचले श्रेणी का बंगला एलॉट करने पर हाई कोर्ट ने काफी तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या वह उच्च वैधानिक पद (लोकायुक्त) को छोटा दिखाने और अपमानित करने की कोशिश कर रही है? इस दौरान अदालत ने लोकायुक्त के बंगले के संबंध में जारी नोटिफिकेशन को निरस्त कर दिया।

दरअसल, जनवरी 2016 को लोकायुक्त संजय मिश्रा को टाइप-IV बंगला एलॉट किया गया था। लेकिन, 2017 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद यह परिस्थिति बदल गई। 3 दिसंबर, 2017 को नई सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी किया और लोकायुक्त के बंगले का ग्रेड कम करके उसे टाइप-V कर दिया। जबकि, इस संदर्भ में राज्य के एडवोकेट जनरल ने इसे कानूनी रूप से गलत करार दिया था। गौरतलब है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मामलों को देखने वाली स्थापित संस्था ‘लोकायुक्त’ राज्य के मुख्य न्यायाधीश के समकक्ष होती है। लेकिन, योगी सरकार ने लोकायुक्त को रिटायर्ड नौकरशाहों की बराबरी में रख दिया। जब लोकायुक्त ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी तब प्रदेश सरकार ने दलील दी कि लोकायुक्त रिटायर्ड नौकरशाहों के समकक्ष हैं।

जिस तरह से राज्य सरकार ने लोकायुक्त की हैसियत की तुलना नौकरशाहों से की उसे देखते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस देवेंद्र कुमार अरोड़ा और रंजन रॉय की बेंच ने तुरंत खारिज कर दिया। कोर्ट ने राज्य के अटॉर्नी जनरल के सुझाव को खारिज करने पर भी यूपी सरकार को डांट पिलायी। इस दौरान हाई कोर्ट ने योगी सरकार से बेहद ही तल्ख सवाल किए। कोर्ट ने पूछा, क्या यह (लोकायुक्त के बंगले का ग्रेड घटाने के संबंध में) इस लिए किया गया क्योंकि लोकायुक्त अपने कर्तव्यों के प्रति ज्यादा ही संवेदनशील रहे? क्या यह एक लोकायुक्त को अपमानित और छोटा दिखाने का प्रयास नहीं है? क्या यह राज्य सरकार को शोभा देता है कि वह लोकायुक्त के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाए?” कोर्ट ने आगे कहा कि वह इन सवालों को सरकार के ऊपर छोड़ता है।