गुजरात: किसानों की हालत दयनीय, 55 पैसे किलो के भाव बेच रहे प्याज़, लहसुन में भी घाटा

गुजरात के भावनगर, राजकोट, जामनगर, अमरेली, जूनागढ़ और कच्छ जिलों में प्याज और लहसुन की काफी पैदावार की जाती है, लेकिन इन फसलों के दामों में चल रही मंदी से इलाके के किसानों की परेशानी काफी बढ़ा दी है।

जनसत्ता ऑनलाइन के मुताबिक गुजरात के प्याज और लहसुन उगाने वाले किसानों को उनकी लागत का भी पैसा नहीं मिल पा रहा।

देश में किसानों के हालात पर खूब बातें होती हैं, लेकिन जमीन पर उनके हालात सुधरते नहीं दिखाई दे रहे हैं। ताजा मामला गुजरात का है, जहां प्याज और लहसुन उगाने वाले किसानों को फसल बेचने के दौरान भारी घाटा उठाना पड़ रहा है और उन्हें उनकी मेहनत और लागत का पैसा भी नहीं मिल रहा है। द हिंदू की एक खबर के अनुसार, गुजरात के राजकोट जिले के रहने वाले एक किसान धर्मेंद्र नरसी पटेल ने क्रिसमस के दिन यानि कि 25 दिसंबर को अपनी 3,590 किलो प्याज की फसल गोंडल स्थित एग्री प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी में सिर्फ 1,974 रुपए में बिकी।

पटेल की तरह ही प्याज और लहसुन उगाने वाले हजारों किसानों को इसी तरह अपनी फसल जबरदस्त घाटे में बेचने को मजबूर होना पड़ा है। बता दें कि गुजरात के भावनगर, राजकोट, जामनगर, अमरेली, जूनागढ़ और कच्छ जिलों में प्याज और लहसुन की काफी पैदावार की जाती है, लेकिन इन फसलों के दामों में चल रही मंदी से इलाके के किसानों की परेशानी काफी बढ़ा दी है।

एक किसान का कहना है कि एग्री प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी में प्याज और लहसुन की फसल का दाम 20 से 80 रुपए प्रति 20 किलो मिल रहा है। इसका मतलब ये है कि किसानों को उनकी प्रति क्विंटल फसल के लिए सिर्फ 250 से 350 रुपए मिल रहे हैं। इलाके के किसानों का कहना है कि फसल के कम दामों के चलते उन्हें अपनी फसल को अपने घर में ही रखने को मजबूर होना पड़ा है। राज्य के विभिन्न एग्री प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी के सेंटरों पर किसानों को अपनी फसल घाटे में बेंचने को मजबूर होना पड़ रहा है। द हिंदू के साथ बातचीत में गुजरात के जामनगर के निवासी किसान भीखाभाई मरकाना का कहना है कि उन्होंने 2 बीघा जमीन पर करीब 40 क्विंटल प्याज की फसल हुई थी। इसमें से वह 23 क्विंटल 40 रुपए प्रति 20 किलो के हिसाब से अपनी फसल बेच चुके हैं।

मरकाना ने बताया कि इस हिसाब से उनकी एक क्विंटल फसल के 200 रुपए मिले। लेकिन उनकी फसल के लिए मजदूरी, बीज, फर्टिलाइजर्स और सिंचाई आदि का खर्च मिला लिया जाए तो उनका खर्च 2 बीघा के लिए करीब 12000 रुपए हुआ। लेकिन अब फसल बेचने पर उन्हें सिर्फ 8000-10000 रुपए मिल रहे हैं। किसानों का कहना है कि इतनी मेहनत और वक्त लगाने के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है। जिससे किसानों में निराशा का माहौल है।