सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आईटी की धारा 66ए में गिरफ्तारी करने वाले अफसरों को जेल भेज देंगे

सुप्रीम कोर्ट ने ही 24 सितंबर 2015 में आईटी की धारा 66ए समाप्त करने का आदेश दिया था

इस धारा में वेबसाइट पर कथित अपमानजनक सामग्री साझा करने वाले की गिरफ्तारी करने का प्रावधान था सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में खत्म की गई आईटी की धारा 66ए के तहत अब भी हो रहीं गिरफ्तारियों को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार को फटकार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर इसे नहीं रोका गया तो ऐसा करने वाले अफसरों को जेल जाना होगा। समाप्त की गई धारा के तहत किसी भी व्यक्ति को वेबसाइट पर कथित तौर पर अपमानजनक

सामग्री साझा करने पर गिरफ्तारी का प्रावधान था।

सरकार को 4 हफ्ते का वक्त

इस मामले में मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पीपुल्स यूनियस फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) ने जनहित याचिका दायर की है। जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच ने इस पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार को चार हफ्ते का समय दिया है।

इस मामले में मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पीपुल्स यूनियस फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) ने जनहित याचिका दायर की है। जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच ने इस पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार को चार हफ्ते का समय दिया है।

जस्टिस नरीमन ने कहा, ‘‘अगर इन्होंने (याचिकाकर्ता) जो आरोप लगाए हैं वह सही हैं तो आप लोगों को कड़ी से कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने उन लोगों की सूची दी है जिन पर मुकदमा चलाया गया है। हम उन सभी लोगों को जेल में भेज देंगे जिन्होंने गिरफ्तारी का आदेश दिया था। हम सख्त कदम उठाने वाले हैं।’’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आईटी कानून की धारा 66ए को समाप्त करने के उसके आदेश का उल्लंघन किया गया तो संबंधित अधिकारियों को गिरफ्तार किया जाएगा।

पीयूसीएल ने अपनी याचिका में कहा है कि आईटी कानून की धारा 66ए को खत्म किए जाने के बाद भी इस मामले में 22 से ज्यादा लोगों के खिलाफ केस दायर किए गए हैं।

66A के संशोधन में पहली याचिका कानून छात्रा श्रेया ने की थी

न्यायामूर्ति जे चेलमेश्वर और आर एफ नरीमन की एक पीठ ने 2015 में विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को ‘मौलिक’ बताते हुए कहा था, ‘जनता का जानने का अधिकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 ए से सीधे प्रभावित होता है.’ आईटी कानून की धारा 66ए में संशोधन के लिए कानून की छात्रा श्रेया सिंघल ने 2012 में पहली जनहित याचिका दायर की थी. महाराष्ट्र के ठाणे जिले के पालघर से शाहीन और रेनू की गिरफ्तारी के बाद श्रेया ने यह याचिका दायर की थी.