अगस्ता वेस्टलैंड घोटालाः क्रिश्चियन मिशेल ने अब लिया बीजेपी नेता का नाम, ईडी की हिरासत में उड़ा रहा मिठाई-बिरयानी!

मिशेल फिलहाल नई दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में है। उससे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इन दिनों पूछताछ में जुटी है।

जनसत्ता ऑनलाइन के मुताबिक अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल ने नया खुलासा किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ में अब उसने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक नेता का नाम लिया है। कहा है कि बीजेपी नेता ने ही कंपनी (अगस्ता वेस्टलैंड) का नाम ब्लैकलिस्ट की सूची से हटाने के लिए सिफारिश की थी। हालांकि, उस बीजेपी के नेता का नाम सामने नहीं आया है।शनिवार को पटियाला हाउस कोर्ट ने मिशेल की पेशी के दौरान 26 फरवरी तक के लिए उसकी न्यायिक हिरासत बढ़ा दी।

बता दें कि मिशेल को भारत लाने के बाद से बीजेपी लगातार दावे कर रही थी कि तमाम घोटालेबाजों के नाम सामने आएंगे। ईडी हिरासत में हुई पूछताछ के दौरान यह पूछे जाने पर कि क्या अगस्ता वेस्टलैंड का नाम ब्लैकलिस्ट से हटाने में किसी ने मदद की थी? मिशेल ने इसके जवाब में एक बीजेपी नेता का नाम लिया था।

मिशेल फिलहाल नई दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में है। करीब 14 दिनों से ईडी उससे पूछताछ कर रही है। नेताओं को घूस के मामले में पूछे जाने पर उसने गोल-मोल जवाब दिए। सूत्रों के हवाले से टीवी रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि उसे जेल में उसे लजीज खाना लाकर दिया गया। कनॉट प्लेस से उसके लिए मिठाई (गुलाब जामुन) लाई गई, जबकि चांदनी चौक से बिरयानी मंगाई गई थी।

मिशेल ने इससे पहले कबूला था कि वह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की अध्यक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी और तांत्रिक चंद्रस्वामी सरीखे रसूखदार लोगों को जानता है। इससे पहले, ईडी ने दावा किया था कि मिशेल ने पूछताछ के दौरान ‘मिसेज गांधी’ की जिक्र किया। माना जा रहा है कि उसने यहां सोनिया गांधी का उल्लेख किया। बीजेपी ने इसी मसले पर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था।

कांग्रेस की तरफ से 30 दिसंबर, 2018 को कहा गया था, “देश जानना चाहता है कि आखिर किस वजह से अगस्ता वेस्टलैंड सरीखी ब्लैकलिस्ट में डाली गई कंपनी को नौसेना के 100 हेलीकॉप्टरों के लिए बोली लगाने की अनुमति दी गई? सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट से क्यों हटाया? कंपनी को देश में एडब्ल्यू119 सैन्य हेलीकॉप्टरों के निर्माण की मंजूरी कैसे मिली?”