बीजेपी वाले सपा-बसपा में शामिल होने को बेचैन: अखिलेश यादव

सपा प्रमुख ने ट्वीट कर लिखा कि गठबंधन की वजह से भाजपा का शीर्ष नेतृत्व हिम्मत हारकर बैठा है। भाजपा कार्यर्ता कह रहे हैं कि उनका बूथ चकनाचूर हो गया।

जनसत्ता ऑनलाइन की खबर के मुताबिक आगामी लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के एक साथ चुनाव चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधा है। सपा प्रमुख ने ट्वीट कर लिखा कि गठबंधन की वजह से भाजपा का शीर्ष नेतृत्व हिम्मत हारकर बैठा है। भाजपा कार्यर्ता कह रहे हैं कि उनका बूथ चकनाचूर हो गया। रविवार (13 जनवरी, 2019) को अखिलेश ने ट्वीट कर लिखा, ”बसपा-सपा में गठबंधन से ना केवल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व व पूरा संगठन बल्कि कार्यकर्ता भी हिम्मत हार बैठे हैं। अब भाजपा बूथ कार्यकर्ता कह रहे हैं कि ‘मेरा बूथ, हुआ चकनाचूर’। ऐसे निराश-हताश भाजपा नेता-कार्यकर्ता अस्तित्व को बचाने के लिए अब बसपा-सपा में शामिल होने के लिए बेचैन हैं।”

इसके अलावा शनिवार को एक अन्य ट्वीट में अखिलेश ने लिखा, ‘आज (शनिवार) का दिन हमारे देश के लिए ऐतिहासिक है जब भाजपा से देश के संविधान व सौहार्द की रक्षा तथा दलितों, वंचितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों पर हो रहे उनके अन्याय व अत्याचार से लड़ने के लिए बसपा-सपा दोनों एक साथ आ गए हैं। ये एकजुटता भारतीय राजनीति को एक नई दिशा देगी और निर्णायक साबित होगी।’

जानना चाहिए कि बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए शनिवार को उत्तर प्रदेश में गठबंधन का ऐलान किया। दोनों ही दल राज्य की 80 संसदीय सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। इस गठबंधन से दोनों ही दलों ने कांग्रेस को अलग रखा लेकिन कहा कि वे अमेठी और रायबरेली सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। इन सीटों का प्रतिनिधित्व क्रमश: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और संप्रग प्रमुख सोनिया गांधी करती हैं। गठबंधन ने दो अन्य सीटें छोटे दलों के लिए छोड़ी हैं।

गौरतलब है कि महागठबंधन से खुद को अलग रखे जाने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आगामी लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए रविवार को यहां एक बैठक की। कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रभारी गुलाम नबी आजाद और प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने लोकसभा चुनाव की रणनीति को लेकर पार्टी राज्य मुख्यालय पर गहन विचार मंथन किया।