अर्द्धकुंभ का नाम कुंभ करने के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका को याचिकाकर्ताओं ने वापस लिया

अर्द्धकुंभ 2019 का नाम बदलकर कुंभ करने की सरकारी घोषणा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। अधिवक्ता सुनीता शर्मा और तृप्ति वर्मा ने जनहित याचिका दाखिल कर वर्तमान कुंभ मेले को अर्द्धकुंभ के नाम से प्रचारित करने की मांग की थी। कोर्ट में दाखिल होने के याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका को वापस लेने की अर्जी लगा दी और इस याचिका को वापस ले लिया। याचिका वापस लेने के पीछे क्या कारण या दवाब रहा इसकी जानकारी नहीं मिल सकी।

याचिका में संतों की सभा बुलाकर माघ मास में प्रयाग में लगने वाले मेले को अर्द्धकुंभ घोषित करने की मांग की गई। याची का कहना है कि प्रयाग में छह वर्ष के अंतराल पर अर्द्धकुंभ और 12 साल में कुंभ का आयोजन होता है। जब वृष राशि में गुरु तथा सूर्य और चंद्र मकर राशि में एक साथ आते हैं तब कुंभ और अर्द्धकुंभ लगता है। यह पौराणिक व्यवस्था है।

मगर, प्रदेश सरकार ने अर्द्धकुंभ का नाम बदलकर कुंभ कर दिया है। यह न सिर्फ भ्रामक है, बल्कि हिंदू मान्यताओं के खिलाफ भी है। ऐसे में नाम बदलना भारतीय संस्कृति परंपरा के विपरीत है। बता दें कि इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किए जाने के खिलाफ भी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट ने इस पर लंबी सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है।