मोदी सरकार में नागरिक स्वतंत्रता पर पहरे से डेमोक्रेसी इंडेक्स में 41वें पायदान पर पहुंचा भारत, 2014 में था 27वें नंबर पर

देश में मोदी शासन के दौरान लोकतांत्रिकव्यवस्था के पैमाने पर देश कई पायदान नीचे गिर गया है। द इकोनॉमिस्ट इंटेलीजेंसयूनिट के डेमोक्रेसी इंडेक्स में भारत 41वें पायदान पर पहुंच गया है, जबकि 2014में यह 27वें नंबर पर था।

केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद से देश में लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन हो रहा है, असहमति की आवाज़ों को दबाया जा रहा है, बहुसंख्यवाद का बोलबाला है और राजनीतिक विमर्श का स्तर गिरता जा रहा है। यह बात सामने आई है डेमोक्रेसी इंडेक्स यानी लोकतांत्रिक सूचकांक में भारत की लगातार गिरती साख से। इस पैमाने पर भारत बीते चार साल में 14 पायदान नीचे गिरकर 41वें नंबर पर पहुंच गया है, जबकि 2014 में यह 27वें नंबर पर था।

नवजीवन के मुताबिक रिपोर्ट में कहा गया है कि, “भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि महत्वाकांक्षी मध्य वर्ग से मिलती है और मोदी को कारोबारी लोगों का समर्थन मिल रहा है। लेकिन मोदी अपराजेय नहीं हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अनदेखी के चलते किसानों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा। नौकरियों के मोर्चे पर नाकामी और संस्थागत सुधारों में धीमापन रहा है। जो सुधार किए गए हैं, उन्हें सही ढंग से लागू नहीं किया गया। अभी तक मोदी आलोचना से बचते रहे हैं, लेकिन उनकी पार्टी बीजेपी 2019 का चुनाव राज्य स्तर पर कमजोर राजनीतिक जमीन पर लड़ेगी। कई छोटे दलों का समर्थन खो चुकी बीजेपी लोकसभा में स्पष्ट बहुमत हासिल करने में नाकाम रह सकती है।”

रिपोर्ट के मुताबिक, “सत्तारूढ़ एनडीए विधानसभा चुनावों में अपनी साख बचाने में संघर्षरत दिखा, दरअसल एक तरह से यह देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की ताकत का प्रदर्शन है, जिसके चलते तमाम विभाजनकारी नीतियां अपने के बावजूद केंद्र सरकार को निराशा हाथ लगी।”

द इकोनॉमिस्ट इंटेलीजेंस यूनिट ने देशों को चार श्रेणियों में बांटा है। इनमें पूर्ण लोकतंत्र, दोषपूर्ण लोकतंत्र, संकीर्ण शासन और तानाशाही शासन है। दोषपूर्ण लोकतंत्र के सूचकांक में भारत 2014 के तीसरे पायदान से नीचे गिरकर 2018 में 21वें पायदान पर पहुंच गया है। इस पैमाने पर भारत का स्कोर लगातार नीचे जा रहा है। 2014 में भारत का स्कोर 7.92 था, जो 2016 में 7.81 और 2018 में 7.23 पहुंच गया।

इस मामले में रैंकिग का आधार 60 सूचकों पर होता है जिनमें एक-दूसरे से जुड़ी पांच श्रेणियां होती हैं। जैसे चुनावी प्रक्रिया और बहुलतावादा, नागरिक स्वतंत्रता, सरकार का कामकाज, राजनीतिक भागीदारी और राजनीतिक विमर्श या संस्कृति। हर श्रेणी में शून्य से 10 अंक होते हैं, और आखिर स्कोर सभी श्रेणियों का औसत होता है।

चुनावी प्रक्रिया और बहुलतावाद के मामले में भारत का स्कोर 9.17 है जबकि 2014 और 2016 में यह 9.58 था। इसी तरह सरकार कामकाज के मामले में भारत का स्कोर 2014 के 7.14 और 2016 के 7.50 के मुकाबले 2018 में 6.79 पहुंच गया। राजनीतिक भागीदारी के मोर्चे पर भी भारत का स्कोर 7.22 पर है जबकि राजनीतिक विमर्श और संस्कृति के मामले में भी कोई सुधार नहीं हो रहा है।

लेकिन भारत ने जिस मोर्चे पर सबसे खराब प्रदर्शन किया है वह सिविल लिबर्टीज़ यानी नागरिक स्वतंत्रता। इस मामले में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। 2014 में सिविल लिबर्टीज के मामले में भारत का स्कोर 2014 में 9.41 था जो 2016 में 9.12 और 2018 में 7.35 पहुंच गया।

डेमोक्रेसी इंडेक्स में नॉर्वे, आइसलैंड, स्वीडन, न्यूजीलैंड और डेनमार्क शीर्ष पर हैं। इन देशों को पूर्ण लोकतंत्र घोषित किया गया है, क्योंकि इनका हर श्रेणी में स्कोर 9.22 है जोकि पूर्ण लोकतंत्र के लिए जरूरी 8.2 के स्कोर से अधिक है।

लेकिन, अमेरिका को 7.96 स्कोर के साथ दोषपूर्ण लोकतंत्र की श्रेणी में रखा गया है। अमेरिका का अधिकतम स्कोर 2006 और 2008 में रहा था।