रेलवे को प्राइवेट कंपनियों को सौंपने की तैयारी, निजी हाथों में ट्रेनों का संचालन देने पर चल रही है बात

किराया तय करने और टर्मिनल का निर्माण करने की इजाजत निजी ऑपरेटर्स को दी जा सकती है कि नहीं, इस पर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी और इस क्षेत्र के विशेषज्ञ चर्चा कर रहे हैं।

रेलवे के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि रेलवे की यात्री ट्रेन और मालवाहक ट्रेनों के परिचालन को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है।

रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ सदस्य ने शुक्रवार को कहा कि रेलवे यात्री ट्रेनों एवं मालगाड़ियों के परिचालन के लिए निजी ऑपरेटरों को अनुमति देने पर विचार कर रहा है। रेलवे बोर्ड के सदस्य (यातायात) गिरीश पिल्लई ने परिवहन अनुसंधान एवं प्रबंधन केंद्र (सीटीआरएम) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि वरिष्ठ अधिकारी अभी इस मामले पर विचार कर रहे हैं। पिल्लई ने कहा, “दुनिया भर में ट्रेनों के परिचालन में कई बदलाव हुए हैं और मेरा मानना है कि यह ऐसा समय है कि भारत को यात्री ट्रेनों के परिचालन में निजी ऑपरेटरों को अनुमति देने के विकल्प पर चर्चा करनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि उन्हें किराया तय करने और टर्मिनल का निर्माण करने की इजाजत दी जा सकती है कि नहीं, इस पर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी और इस क्षेत्र के विशेषज्ञ चर्चा कर रहे हैं।

पिल्लई ने यह भी कहा कि मालढुलाई के क्षेत्र को यात्री सेवाओं से अलग करने की जरूरत है। इससे इतर एक अन्य मामले में रेलवे सवारी गाड़ियों के स्थान पर मेमू चलाने पर भी विचार कर रहा है। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। माना जा रहा है कि रेलवे के इस कदम से यात्रा समय में कमी आएगी और व्यस्त मार्गों पर यातायात में भी कमी आएगी। बता दें कि यह योजना स्वर्णिम चतुर्भज पर लागू करने पर विचार किया जा रहा है। स्वर्णिम चतुर्भुज दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को जोड़ता है। रेलवे बोर्ड के सदस्य (रॉलिंग स्टॉक) राजेश अग्रवाल ने कहा कि मेमू ट्रेनें शुरू होने से यात्रा में कम समय लगेगा क्योंकि ऐसी ट्रेनें जल्दी ही रफ्तार पकड़ लेती हैं। ऐसी ट्रेनें 300 से 500 किलोमीटर की दूरी के बीच चलती है।

सवारी गाड़ियां अक्सर प्रमुख जंक्शनों को छोटे स्टेशनों से जोड़ती हैं। आम तौर पर ऐसी गाड़ियां पूरी तरह से अनारक्षित होती हैं। हालांकि कुछ ट्रेनों में आरक्षित डिब्बे भी होते हैं। सवारी गाड़ियों की रफ्तार कम होती है लेकिन मेमू ट्रेनों की अधिकतम गति करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटा और औसत गति करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। इन नयी ट्रेनों के हर डिब्बों में दो शौचालय भी होंगे। यही वजह है कि रेलवे सवारी गाड़ियों के स्थान पर मेमू चलाने पर विचार कर रहा है।