बीजेपी की मुश्किल, पश्चिम बंगाल में एक दशक पुराने सहयोगी GJM ने भी छोड़ा साथ, अब तक 17 दलों ने मोदी को कहा अलविदा

पश्चिम बंगाल में करीब एक दशक तक बीजेपी के सहयोगी दल रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने आधिकारिक तौर पर गठबंधन खत्म करने की घोषणा कर दी है।

जनसत्ता ऑनलाइन के मुताबिक पश्चिम बंगाल में करीब एक दशक तक बीजेपी के सहयोगी दल रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने आधिकारिक तौर पर गठबंधन खत्म करने की घोषणा कर दी है। जीजेएम के नेता 19 जनवरी को कोलकाता में हुई ममता बनर्जी की मेगा रैली में शामिल हुए थे। उस वक्त से बीजेपी और जीजेएम का साथ अलग होने की अटकलें लगने लगी थीं। अब उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी को पत्र लिखकर गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जाहिर की है।

इस वजह से छूटा साथ :

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र में एनडीए सरकार के होने से बावजूद जीजेएम की मांगों को पूरा नहीं किया गया। इसके वजह से पार्टी के नेता नाराज थे। बता दें कि जीजेएम काफी समय से गोरखालैंड की मांग कर रहा है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि सत्ता में आने पर बीजेपी ने उनकी मांगों पर विचार करने का वादा किया था। अब मोदी सरकार को साढ़े 4 साल बीत चुके हैं, लेकिन गोरखालैंड को लेकर कोई पहल नहीं की गई।

बीजेपी को होगा नुकसान :

पश्चिम बंगाल के पर्वतीय क्षेत्र में जीजेएम की पकड़ काफी मजबूत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गोरखा जनमुक्ति मोर्चा कम से कम चार लोकसभा सीटों के समीकरण को बिगाड़ सकता है। फिलहाल पर्वतीय क्षेत्र की दार्जिलिंग लोकसभा सीट से बीजेपी के एसएस अहलूवालिया सांसद हैं। माना जा रहा है कि जीजेएम के अलग होने से बीजेपी के हाथों से दार्जिलिंग सीट फिसल सकती है। साथ ही, अन्य सीटों पर भी पार्टी का वोट पर्सेंटेज घट सकता है।

अब तक 17 पार्टियों ने NDA को कहा अलविदा :

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की भारी जीत के बावजूद साढ़े 4 साल में कुल 17 पार्टियां एनडीए से अलग हो चुकी हैं। इनमें हरियाणा जनहित कांग्रेस, तमिलनाडु की एडीएमके, पीएमके व डीएमडीके, केरल की रेवोलुशनरी सोशलिस्ट पार्टी (बोलशेविक), जनाधिपत्य राष्ट्रीय सभा, स्वाभिमानी पत्र, हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा, रालोसपा, तेलुगु देशम पार्टी आदि शामिल हैं।