रिपोर्ट: इन चीनी एप्‍स को हर जानकारी दे रहा आपका स्‍मार्टफोन, विदेश जाता है डेटा

उल्लेखनीय है कि दिसंबर, 2017 में भारत के रक्षा मंत्रालय ने भी चीन की 40 डिजिटल एप्लीकेशंस पर भारतीय उपभोक्ताओं के डाटा पर नजर रखने का आरोप लगाया था और अपने कर्मचारियों को फोन से चाइनीज एप्लीकेशंस हटाने के निर्देश दिए थे।

जनसत्ता ऑनलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, चाइनीज डिजिटल एप्लीकेशंस भारतीय उपभोक्ताओं का डाटा कई अन्य एजेंसियों को ट्रांसफर कर रही हैं।

चाइनीज डिजिटल एप्लीकेशंस जैसे शेयरइट, यूसी ब्राऊजर आदि इन दिनों भारत में काफी इस्तेमाल की जा रही हैं। अब एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि इन चाइनीज एप्लीकेशंस द्वारा उपभोक्ताओं की वो जानकारियां भी मांगी जा रही हैं, जिनकी एप्लीकेशंस को कोई जरुरत नहीं होती। इस खुलासे के बाद एक बार फिर भारतीय उपभोक्ताओं की डाटा सुरक्षा पर सवालिया निशान लग गया है! इतना ही नहीं रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय उपभोक्ताओं का कीमती डाटा चाइनीज डिजिटल एप्लीकेशंस द्वारा कई विदेशी एजेंसियों को ट्रांसफर किया जा रहा है। इकोनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुणे बेस्ड एक इंफोर्मेशन सिक्योरिटी फर्म Arrka Consulting ने अपनी एक स्टडी में पता लगाया है कि चीन की डिजिटल एप्लीकेशंस, जिनमें Helo, Shareit, TikTok, UC Browser, Vigo Video, Beauty Plus, Club factory Everything, News-Dog, UC news और VMate द्वारा भारतीय उपभोक्ताओं से जरुरत से ज्यादा उनकी निजी जानकारियां मांगी जा रही हैं। ये एप्स भारतीय उपभोक्ताओँ से उनके कैमरे और माइक्रोफोन्स तक का एक्सेस मांगती हैं, जो कि किसी भी उपभोक्ता की डाटा सुरक्षा के नजरिए काफी संवेदनशील मामला है।

स्टडी करने वाली फर्म Arrka Consulting के को-फाउंडर संदीप राव का कहना है कि चीन की करीब 10 और दनिया भर की टॉप 50 डिजिटल एप्लीकेशंस उपभोक्ताओँ से 45% ज्यादा जानकारी मांग रही हैं। इकोनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, औसत तौर पर चाइनीज एप्लीकेशंस ये डाटा 7 विदेशी एजेंसियों को ट्रांसफर कर रही हैं। 69% डाटा अमेरिका भेजा जा रहा है। टिक-टॉक अपना डाटा चाइना टेलीकॉम को भेज रही है। वीगो वीडियो, टैनसेंट को, ब्यूटी प्ल्स अपना डाटा Meitu, वहीं यूसी ब्राऊजर अपना डाटा अपनी मदर कंपनी अलीबाबा को भेज रही है। हालांकि ये एजेंसियां उपभोक्ताओं के इस डाटा का क्या इस्तेमाल कर रही हैं, इसके बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है।

उल्लेखनीय है कि दिसंबर, 2017 में भारत के रक्षा मंत्रालय ने भी चीन की 40 डिजिटल एप्लीकेशंस पर भारतीय उपभोक्ताओं के डाटा पर नजर रखने का आरोप लगाया था और अपने कर्मचारियों को फोन से चाइनीज एप्लीकेशंस हटाने के निर्देश दिए थे। प्राइवेसी एक्सपर्ट का तो मानना है कि ना सिर्फ चाइनीज डिजिटल एप्लीकेशंस द्वारा बल्कि चाइनीज स्मार्टफोन द्वारा भी भारतीय उपभोक्ताओं के डाटा में सेंध लगायी जा रही है। Arrka Consulting की को-फाउंडर शिवांगी नादकर्णी का कहना है कि भारत में अभी तक भी कोई प्राइवेसी कानून नहीं है, जिसके चलते भारत में उपभोक्ताओं की निजी जानकारी हासिल करना काफी आसान माना जाता है। वहीं अमेरिका, चीन आदि देशों में निजी जानकारी हासिल करने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं।