पड़ताल: क्या कुंभ में करोड़ों लोगों के आने-नहाने का दावा झूठा है?

मंगला तिवारी

Mangla Prasad Tiwari : इसको कहते हैं 56 इंच का सीना, सब करोड़ों में पर अमर उजाला सबसे अलग… एक ओर जहां पूरा शासनिक प्रशासनिक कुनबा गला फाड़ फाड़ कर चिल्ला रहा है ‘दिव्य कुंभ, भव्य कुंभ’, और इसके लिए हजारों दावे, वादे तो किए ही जा रहे हैं, करोडो़ के विज्ञापन, होर्डिंग्स, बैनर्स, के साथ अपनी बातों को पुष्ट करने की कोशिश भी की जा रही है। पर इससे इतर कुछ लोगों की स्थिती बिल्कुल अलग है फिर चाहे वो कुंभ में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हो, सुविधाएं हो या फिर स्नानार्थियों की संख्या।

बता दें कि शासन प्रशासन प्रत्येक स्नान पर स्नाननार्थियों का एक आंकड़ा जारी करता है जो करोड़ों में होता है, पर स्थिति क्या है ये स्थानीय (प्रयागराज वासी) सहित बाहरियों को भी पता है। हां, सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो अब तक कुंभ क्षेत्र में लगभग 5 से 6 बार आग लग चुकी है जिसमें कई पंडाल जलकर स्वाहा हो गए, स्थिति ठीक है कि कोई हताहत नहीं हुआ, सुविधाओं का ये आलम है कि शौचालय है तो पानी नहीं, पानी है तो शौचालय इतनें गंदे पड़े हैं कि आप उपयोग में ही नहीं ले सकते।

लेकिन भैया, एक बात बहोत क्लीयर और स्पष्ट बता दूं कि यह कुंभ दिव्य भी है और भव्य भी, क्योंकि हमारा अखबार (हिन्दुस्तान) भी यही लिख रहा है, तो हम न प्रयागराज से अलग हैं, ना हिन्दुस्तान से और ना ही कुंभ से। बाकि जिसने भी ये खबर लगाने की हिम्मत दिखाई है वो बधाई का पात्र है, मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं। धन्यवाद।

मंगला तिवारी
हिन्दुस्तान, प्रयागराज

इलाहाबाद के पत्रकार मंगला तिवारी की एफबी वॉल से.