मोदी सरकार में वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी बरकरार, पाकिस्तान और चीन के फाइटर जेट्स बढ़ाएंगे चिंता

2002 में वायुसेना के पास पूरे 42 फाइटर जेट्स का स्क्वैड्रन था। हर स्क्वैड्रन में आम तौर पर 18 लड़ाकू विमान होते हैं। हालांकि, इससे पहले हुए कारगिल की जंग के बाद वायुसेना ने आधिकारिक तौर पर मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MMRCA) के 7 बेड़ों को शामिल करने की मांग की थी।

इंडियन एक्सप्रेस ने आधिकारिक दस्तावेजों की समीक्षा की है, जो बताते हैं कि भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में 30 लड़ाकू स्क्वॉड्रन हैं, यह संख्या 2021 और 2022 में 26 हो जाएगी।

अगले 2 साल में भारतीय वायुसेना लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ सकती है। दो साल बाद वायुसेना के पास फाइटर जेट्स के 26 स्क्वैड्रन या दस्ते ही बचेंगे। एयरफोर्स के लिए विमानों के 42 दस्तों की मंजूरी है। फ्रेंच लड़ाकू विमान राफेल और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस की सप्लाई वक्त पर पूरी होने के बावजूद ये स्थिति आ सकती है। वहीं, उसी वक्त पाकिस्तानी एयरफोर्स के पास लड़ाकू विमानों के 25 स्क्वैड्रन जबकि चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के पास 42 लड़ाकू विमानों के बेड़े ऑपरेट करने की क्षमता होगी।

द इंडियन एक्सप्रेस ने आधिकारिक दस्तावेज की पड़ताल की है। इससे पता चलता है कि भारतीय वायु सेना के पास फिलहाल 30 फाइटर जेट हैं। 2021 और 2022 तक यह संख्या घटकर 26 रह जाएगी। तब तक सोवियत काल के पुराने मिग विमानों के 6 बेड़े इस्तेमाल से बाहर हो जाएंगे। वहीं, फ्रेंच राफेल और एचएएल निर्मित तेजस के एक-एक बेड़े ही वायुसेना में शामिल किए जा सकेंगे। आकलन के मुताबिक, 2027 तक फाइटर जेट्स के बेड़ों की संख्या बढ़कर 30 हो जाएगी। इनमें एलसीए तेजस के चार और बेड़े भी शामिल होंगे। यहां बता दें कि 83 एलसीए मार्क1 एक लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए अभी वायुसेना और एचएएल के बीच डील पर हस्ताक्षर होने बाकी हैं।

2002 में वायुसेना के पास पूरे 42 फाइटर जेट्स का स्क्वैड्रन था। हर स्क्वैड्रन में आम तौर पर 18 लड़ाकू विमान होते हैं। हालांकि, इससे पहले हुए कारगिल की जंग के बाद वायुसेना ने आधिकारिक तौर पर मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MMRCA) के 7 बेड़ों को शामिल करने की मांग की थी। 2007 में 126 MMRCA विमानों के लिए टेंडर जारी किए गए थे। वायुसेना ने इसके लिए ट्रायल किए, जिसके बाद राफेल को सिलेक्ट किया गया। हालांकि, जून 2015 में इसकी डील रद्द कर दी गई।

बीजेपी की अगुआई वाली एनडीए सरकार ने अप्रैल 2015 में 36 लड़ाकू विमान खरीदने का फैसला किया था। तत्कालीन डिफेंस मिनिस्टर मनोहर पर्रिकर ने उस वक्त सिंगल इंजन वाले विदेशी फाइटर जेट मसलन स्वीडिश ग्रिपेन और अमेरिकी एफ16 खरीदने की योजनाओं की चर्चा की थी। विमानों की कमी से निपटने के लिए इन फाइटर जेट्स को मेक इन इंडिया की कवायद के तहत स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप मॉडल के तहत हासिल करना था। हालांकि, इस योजना पर अमल नहीं हो सका और एचएएल से कहा गया कि वे दिसंबर 2017 तक और 83 एलसीए तेजस मार्क1 एक विमानों की सप्लाई दें। स्वदेशी एलसीए तेजस के प्रोडक्शन और सप्लाई में देरी ने भी लड़ाकू विमानों के संकट को बढ़ाया है।