प्रधानमंत्री आवास योजना: गरीबों का घरों का सपना अधूरा, दो वर्षों में 1 करोड़ का था लक्ष्‍य, बने 67 लाख

मोदी सरकार की ओर से 1 फरवरी को पांच साल के पहले कार्यकाल का अंतिम बजट पेश किया जाएगा। दो साल में गरीबों के लिए 1 करोड़ घर बनाने का लक्ष्‍य रखा गया था। पिछले बजट में मौजूदा वित्‍त वर्ष में 51 लाख आवास का निर्माण किया जाना था, लेकिन सरकार अभी तक इस लक्ष्‍य को हासिल करने में विफल रही है।

जनसत्ता ऑनलाइन के मुताबिक मोदी सरकार ने वर्ष 2022 तक सभी गरीबों को घर देने का लक्ष्‍य रखा है, लेकिन पिछले दो साल के लिए रखा गया टारगेट हासिल नहीं किया जा सका है।

मोदी सरकार ने वर्ष 2022 तक सभी गरीबों को आवास मुहैया कराने का लक्ष्‍य रखा है। अरुण जेटली ने वर्ष 2018 के आम बजट में ग्रामीण क्षेत्र के गरीबों के लिए वित्‍त वर्ष 2018-19 में 51 लाख नए घर बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए अफोर्डेबल हाउसिंग फंड बनाने की भी बात कही गई थी। इस अवधि में शहरी क्षेत्रों के गरीबों के लिए भी 37 लाख घर बनाने का वादा किया गया था। गरीबों को घर मुहैया कराने के लिए वर्ष 2015 में प्राधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण की घोषणा की गई थी। इसके तहत पहले चरण में 1 करोड़ घर के निर्माण का लक्ष्‍य रखा गया था। इसे साल 2017-18 और 2018-19 के वित्‍त वर्ष में पूरा करना था। वित्‍त वर्ष 2018-19 के बजट में 51 लाख घरों के निर्माण का प्रावधान किया गया था। 31 मार्च को मौजूदा वित्‍त वर्ष समाप्‍त हो रहा है, लेकिन सरकार लक्ष्‍य से अभी भी पीछे है।

67 लाख घरों का ही हुआ निर्माण:

बजट में घोषणा के बावजूद गरीबों को घर मुहैया कराने के मामले में मोदी सरकार पिछड़ गई है। सरकार ने दो वित्‍त वर्षों में गरीबों के लिए 1 करोड़ घर बनाने का लक्ष्‍य रखा था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक सिर्फ 67 लाख नए घरों का ही निर्माण हो सका है। लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए दो महीनों में 33 लाख घरों का निर्माण करना होगा। हालांकि, बताया जाता है कि 17 लाख आवास का निर्माण अंतिम चरण में है। बता दें कि मौजूदा वित्‍त वर्ष 31 मार्च को समाप्‍त हो रहा है।

जमीन न होने के कारण 5 लाख घरों का निर्माण अटका:

ग्रामीण क्षेत्र के भूमिहीन गरीबों को खासतौर पर पक्‍का मकान मुहैया कराने का लक्ष्‍य रखा गया है। इस मामले में भी मोदी सरकार पिछड़ गई है। ‘इकोनोमिक टाइम्‍स’ की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे गरीबों के लिए तकरीबन 5 लाख घर का निर्माण जमीन के अभाव में अटक गया है। मोदी सरकार की महत्‍वाकांक्षी योजना के तहत ऐसे गरीबों को आवास मुहैया कराना है। मौजूदा वित्‍त वर्ष के जाने में महज 2 महीने का वक्‍त बचा है, लेकिन अभी भी 4.60 लाख घर का निर्माण पर्याप्‍त जमीन के अभाव में अटका हुआ है। इनमें से 2.40 लाख अकेले बिहार में है। वहीं, इस वजह से तमिलनाडु में भी 30 हजार घरों का निर्माण अभी तक नहीं हो सका है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि मोदी सरकार बजट में की गई घोषणाओं को कैसे हासिल करेगी।

…फिर भी सरकार को लक्ष्‍य हासिल करने का विश्‍वास: लाखों घरों का निर्माण अटकने के बावजूद सरकार को विश्‍वास है कि गरीबों के लिए 1 करोड़ घर का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। वरिष्‍ठ अधिकारियों का कहना है कि 31 मार्च तक 97 लाख घरों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। बाकी बचे घरों का निर्माण भी मई के अंत तक हो जाएगा। मालूम हो कि इंदिरा आवास योजना को प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण में तब्‍दील कर दिया गया था। इसे 1 अप्रैल 2016 को लागू किया गया था। इसके तहत ही मोदी सरकार ने वर्ष 2022 तक सभी गरीबों को छत मुहैया कराने का लक्ष्‍य रखा है।