यूपी: सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण रोस्टर पर योगी सरकार की याचिका खारिज, शिक्षकों की विभागवार नियुक्तियों पर सरकार ला सकती है अध्यादेश

सरकार, इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को खत्म करने के लिए अध्यादेश लाने पर विचार कर रही है, जिसमें शिक्षकों की नियुक्ति कुल सीटों की जगह, विभाग के आधार पर करने की बात कही गई थी।

सरकार, इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को खत्म करने के लिए अध्यादेश लाने पर विचार कर रही है, जिसमें शिक्षकों की नियुक्ति कुल सीटों की जगह, विभाग के आधार पर करने की बात कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आदेश दिया कि सरकारी और सरकारी मदद वाले कॉलेज व विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति फैकल्टी का डिपार्टमेंट-वाइज नियुक्ति होनी चाहिए। आरक्षण के लिए विश्वविद्यालय नहीं बल्कि डिपार्टमेंट को इकाई माना जाना चाहिए।

अध्यादेश लाने का विचार सरकार के मन में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराने के बाद आया। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एससी और एसटी के लिए रिजर्व पदों को विश्वविद्यालय या कॉलेज को एक इकाई मान लेने से नहीं भरी जाएंगी। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने इस आदेश को सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के बाद जारी किया था।

वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, टीचर्स असोसिएशन व राजनीतिक पार्टियों द्वारा हाई कोर्ट के 2017 में आए फैसले को रिजर्व करने के लिए अध्यादेश या बिल लाने की बढ़ती मांग के बीच सरकार इसके विकल्प पर विचार कर रही है। 31 जनवरी से होने वाले 13 दिनों के बजट सत्र के दौरान संसद में अध्यादेश को रेगुलराइज करने के लिए बिल लाया जा सकता है। रिव्यू पिटीशन के अलावा एक यही रास्ता है क्योंकि रिव्यू पिटीशन का निपटारा होने में समय लग सकता है।

हाई कोर्ट के फैसले की बात करें तो UGC ने मार्च, 2018 में दिए आदेश में सभी लेवल के टीचर्स के लिए एक डिपार्टमेंट-वाइज रोस्टर सिस्टम के लिए नए क्लॉज जारी किए थे। यूजीसी ने संस्थानों से फैकल्टी के लिए नए कोटा सिस्टम को लागू करने के लिए एक महीने के अंदर नया रोस्टर तैयार करने को कहा था।