सर्वे: 67 फीसदी लोगों ने कहा मोदी सरकार में “अच्‍छे दिन” नहीं आये, नोटबन्दी और gst लायी संकट

आर्थिक नीतियों के संदर्भ में अधिकांश लोगों ने माना कि मोदी सरकार ने कांग्रेस से बेहतर काम किए हैं। 40 फीसदी जनता का कहना है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में उनकी आमदनी बढ़ी है।

जनसत्ता ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में 63 फीसदी लोगों ने माना है कि मोदी सरकार अच्छे दिन लाने में नाकाम रही है.

लोकसभा चुनाव 2019 में कुछ ही वक्त बचा है। ऐसे में सर्वेक्षणों का दौर भी शुरू हो गया है। देश का मूड क्या है इसे टटोलने की कोशिश की जा रही है। इसी क्रम में इंडिया टुडे ने देश की मानसिकता भांपने की कोशिश की है। इंडिया टुडे के मुताबिक देश की 33 फीसदी जनता मोदी के काम से खुश है। उसका मानना है कि पीएम मोदी ने वादे के मुताबिक अच्छे दिन लाए हैं। जबकि, 63 फीसदी लोगों ने माना है कि मोदी सरकार अच्छे दिन लाने में नाकाम रही है। इन सबके बीच मोदी सरकार की दो योजनाओं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और स्वच्छ भारत अभियान (टॉयलट निर्माण) ने लोगों में अच्छी लोकप्रियता हासिल की है।

गौर करने वाली बात यह है कि नवंबर 2016 में लागू नोटबंदी को पहले मतदाताओं ने बेहतर कदम बताया था। लेकिन, अब जनता ने इसकी वजह से नौकरियों की कमी और छोटे कारोबार के खत्म होने की बात मानी है।

आर्थिक नीतियों के संदर्भ में अधिकांश लोगों ने माना कि मोदी सरकार ने कांग्रेस से बेहतर काम किए हैं। 40 फीसदी जनता का कहना है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में उनकी आमदनी बढ़ी है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए बीजेपी और इनके सहयोगी दलों को बाकी बचे दिनों में सत्ता वापसी के लिए नए राजनीतिक समीकरणों पर गौर करना होगा। आज के हालात में अगर चुनाव होते हैं तो एनडीए को 35 सीटें कम मिल रही हैं। ऐसे में इस घाटे को बैलेंस करने के लिए एनडीए को तमिलनाडु में AIADMK और आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने का विकल्प बचा है।

बीजेपी के पास इसके अलावा ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजेडी) और तेलंगाना में टीआरएस (तेलंगाना राष्ट्र समिति) के साथ चुनाव बाद गठबंधन भी अहम दांव हो सकता है। हालांकि, सर्वे से स्पष्ट है कि बीजेपी के लिए अभी भी तुरुप का पत्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही है। जनता में उनकी लोकप्रियता अभी भी बनी हुई है और मोदी वोटरों को अपनी बातों से संतुष्ट करने का माद्दा रखते हैं।