सत्ता विरोधी लहर का डर: लोकसभा चुनाव संग इन तीन राज्‍यों के विधानसभा चुनाव कराने की तैयारी में मोदी सरकार

हरियाणा में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है। चूंकि राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री मोहन लाल खट्टर सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रहे हैं।

जनसत्ता ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक आगामी चुनाव में ज्यादा से ज्यादा लाभ लेने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का राष्ट्रीय नेतृत्व इस साल लोकसभा चुनाव के साथ महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में भी विधानसभा चुनाव करा सकता है। पार्टी सूत्रों ने यह जानकारी इंडियन एक्सप्रेस को दी है। सूत्रों ने बताया कि टॉप लीडरशिप का मानना है कि इन राज्यों में एक साथ चुनाव उनका सबसे अच्छा दांव हो सकता है। पार्टी के राज्य नेताओं को भी इस मामले में जानकारी दी गई है।

सूत्रों ने बताया कि हालांकि महाराष्ट्र और झारखंड के भाजपा नेतृत्व का विचार है सरकार अपने कार्यकाल पूरा करे जबकि हरियाणा में नेताओं के एक वर्ग का मानना है कि लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव हों तो उन्हें फायदा होगा। महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव अक्टूबर में होने हैं जबकि झारखंड सरकार के पांच साल इस साल दिसंबर में पूरे होंगे। चुनाव कब हों इस मामले में अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अक्ष्यक्ष अमित शाह लेंगे।

पार्टी के एक नेता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि महाराष्ट्र में शिवसेना चाहती है कि भाजपा लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव कराए मगर मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस का मत है कि सरकार अपने पांच साल पूरे करे। पार्टी लीडर ने कहा, ‘शिवसेना ने साफ कर दिया है कि अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाते हैं तो वो गठबंधन में चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।’

बता दें कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पहले ही संकेत दे चुके हैं कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी को अकेले मैदान में उतरने के लिए तैयार रहना चाहिए। हालांकि वह शिवसेना के साथ गठबंधन नहीं तोड़ना चाहते। भाजपा और शिवसेना ने लोकसभा चुनाव गठबंधन में लड़ा और महाराष्ट्र की 48 में से 41 सीटें जीतीं।

मगर पांच महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। चुनाव में भाजपा ने 122 सीटें जीतीं जबकि 288 असेंबली सदस्यों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना 6 सीटें जीतने में कामयाब रही। सूत्रों ने बताया कि हरियाणा में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है। चूंकि राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री मोहन लाल खट्टर सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रहे हैं।