यूपी: किसान नेताओं को नहीं भाया बजट! बोले- किसानों का मजाक न बनाए मोदी सरकार

केंद्र सरकार के अंतरिम बजट में किसानों के लिए योजनाओं की भरमार रही लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान सरकार के फैसलों से बहुत खुश दिखाई नहीं दिए। कई किसान नेताओं ने बजट पर उम्मीद के मुातिबक न होने के आरोप लगाए तो किसानों ने भी आर्थिक सहायता की बजाय समर्थन मूल्य पर शत-प्रतिशत खरीद, कर्जमाफी, खाद-बीज सस्ते होने की जरूरत पर बल दिया। साभार: नवभारत टाइम्स के लिए शादाब रिजवी की रिपोर्ट :-

हाइलाइट्स

केंद्र सरकार के अंतरिम बजट में किसानों के लिए की गई घोषणाओं पर किसान नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है
किसान नेताओं ने कर्जमाफी, खाद-बीज का दाम कम करने तथा समर्थन मूल्य पर फसल की खरीद पर जोर दिया
बीकेयू प्रमुख टिकैत ने कहा कि सरकार 500 रुपये का लालच देकर किसानों का वोट पाने की कोशिश कर रही है

मोदी सरकार के अंतरिम बजट को भारतीय किसान यूनियन ने किसान विरोधी करार दे दिया है। शुक्रवार को पेश हुए बजट में केंद्र सरकार किसानों को लुभाने के लिए कई योजनाएं लेकर आई थी। इसमें दो हेक्टेयर से कम जमीन वाले किसानों के लिए सम्मान निधि बनाकर सालाना 6 हजार रुपये आर्थिक मदद सीधे उनके खाते में भेजने की स्कीम भी शामिल है। केंद्र सरकार की यह स्कीम पश्चिमी यूपी के किसानों को पसंद नहीं आई है। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए दो प्रतिशत की ब्याज सहायता और समय पर ऋण भुगतान के लिए 3 प्रतिशत की आर्थिक सहायता को भी किसान नाकाफी बता रहे हैं।

उम्मीद के मुताबिक नहीं बजटः टिकैत

किसानों का कहना है कि वह चाहते थे कि उन्हें उनकी फसल का वाजिब दाम मिलता, खाद-बीज सस्ता होता और बिजली की बढ़ी दरें कम होतीं। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसानों की मदद करने की सरकार की सोच अच्छी है लेकिन असली मदद तब होती जब उनका पूरा कर्ज माफ होता और स्वामीनाथन कमिटी की रिपोर्ट लागू होती। साथ ही फसलों का समर्थन मूल्य पर शत-प्रतिशत खरीद का नियम बनता। उन्होंने खाद-बीज सस्ते होने, बिजली के बढ़े दाम के कम होने तथा किसानों को मिलने वाले खेती के यंत्र सस्ते होने की जरूरत पर जोर दिया। टिकैत ने कहा कि सरकार 500 रुपये का लालच देकर किसानों का वोट पाने की कोशिश कर रही है। यब बजट उम्मीद के मुताबिक नहीं है।

किसान नेता का आरोप, किसानों का मजाक उड़ा रही सरकार

भारतीय किसान आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक चौधरी हरबीर सिंह निलोहा का कहना है कि तीन राज्यों में बीजेपी की हार और किसानों के मुद्दे पर लगातार हमलावर विपक्ष की वजह से वजह से केंद्र सरकार किसानों की मदद के लिए यह योजना लाने को मजबूर हुई है। यह किसानों की मदद करने की नहीं बल्कि सरकार द्वारा उनको बेचारा बनाने की कोशिश है। निलोहा ने भी किसानों की कर्जमाफी की ज्यादा जरूरत बताई।
वहीं किसान शक्ति संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी पुष्पेंद्र सिंह का कहना है कि बजट में किसानों के साथ भद्दा मजाक किया गया है। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा कि 15 लाख रुपये खाते में पहुंचाने का वादा कर सत्ता में आने वाले लोग 500 रुपये महीने की मदद के नाम पर किसानों का मजाक उड़ा रहे हैं। किसान फसल के दाम लेने, कर्ज अदा करने, महंगे खाद-बीज खरीदने के चलते टूटा हुआ है।

किसान भी असंतुष्ट

दो हेक्टेयर जमीन के मालिक नंगला एजदी के किसान बालू सिंह का कहना है कि पांच सौ रुपये के तेल से दो बीघा फसल की सिंचाई तक नहीं की जा सकती। पिलोना के किसान अजय सिंह ने कहा कि सरकार कर्जमाफी के तौर मदद करती लेकिन इस तरह मामूली आर्थिक मदद के नाम पर किसानों का मजाक नहीं बनाना चाहिए था। किसान कुलदीप सिंह, अभिमन्यु सिंह कलंजरी का कहना है बजट ने निराश किया। चुनावी साल में सरकार से काफी उम्मीद थी लेकिन मिला ऊंट के मुंह में जीरा।

आवारा पशुओं से निजात मिलना मुश्किल

केंद्र सरकार के 2019-20 के बजट में गायों के संरक्षण के लिए शुरू की गई कामधेनु योजना को लेकर भी किसान खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे आवारा पशुओं की समस्या से निजात कतई नहीं मिलेगा। भीष्मनगर गांव के किसान रतन सिंह का कहना है कि कामधेनु योजना के तहत गायों का संरक्षण किया जाएगा। उसका फायदा चंद लोग ही ले लेंगे लेकिन क्षेत्र में फसलों को बर्बाद कर रहे हजारों दूसरे आवारा पशुओं से निजात कैसे मिलेगी?

सैनी गांव के किसान जयवीर सिंह और रसूलपुर मुरादनगर के किसान शराफत अली का कहना है कि कामधेनु योजना की तरह पहले भी डेयरी संचालन की स्कीम चल रही है। उसका कोई फायदा किसानों को नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ‘सरकार को चाहिए था कि आवारा पशुओं के संरक्षण के लिए ठोस नीति बनाती।’ झिंझाडपुर के किसान चौधरी नेमीचंद का कहना है कि सरकार बजट बनाने से पहले किसानों से बात करती और फिर समाधान के कदम उठाती। जुमले वाली योजना से किसानों का भला होने वाला नहीं है।