मुद्रा योजना के तहत कितना रोजगार सृजन हुआ छुपा रही मोदी सरकार, मंत्रालय ने RTI के जवाब में नहीं दी जानकारी

मोदी सरकार ने दावा किया है कि मुद्रा योजना के तहत 15.56 करोड़ लोगों को कुल 7.46 लाख करोड़ रुपये का लोन बांटा जा चुका है। लेकिन रोजगार कितने लोगों को मिला, इसका जवाब सरकार ने नहीं दिया।

जनसत्ता ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार के वित्त मंत्री (प्रभारी) पीयूष गोयल द्वारा 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश किया गया था। बजट पेश करने के दौरान पीयूष गोयल ने कहा, “रोजगार मांगने वाले अब रोजगार पैदा कर रहे हैं।” उनका कहने का आशय प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से था, जिसे वर्ष 2015 में लॉन्च किया गया था ताकि छोटे और मध्यम दर्जे के उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जा सके। सरकार ने दावा किया है कि इस योजना के तहत 8.4.2015 से 18.01.2019 तक की अवधि में 15.56 करोड़ लोगों को कुल 7.46 लाख करोड़ रुपये का लोन बांटा जा चुका है। इसमें 4.26 करोड़ नए उद्यमियों को 2.96 करोड़ रुपये मिले। लेकिन हकीकत यह है कि इस योजना के माध्यम से कितने लोगों को रोजगार मिला, इसका जवाब सरकार के पास या तो नहीं है या वह देना नहीं चाहती।

एनडीटीवी द्वारा आरटीआई के तहत पूछा गया, “मुद्रा योजना के तहत कितने रोजगार का सृजन हुआ और किस आधार पर यह आंकड़ा सामने आया है?” इस सवाल का जवाब मंत्रालय द्वारा नहीं दिया गया। इससे पहले नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा था, “मुद्रा योजना के अंतर्गत कितने लोगों को रोजगार मिला, इसका कोई आंकड़ा नहीं है। लेकिन नए रोजगार का सृजन हुआ है।” वहीं, मुद्रा योजना की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि 90 प्रतिशत लोन 50 हजार या उससे कम राशि के दिए गए। जबकि इस योजना के तहत 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जा सकता है। अब ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर 50 हजार रुपये में कैसे किए नए उद्यम की स्थापना हो सकती है और लोगों को रोजगार दिया जा सकता है।

बता दें कि बजट पेश करने के दौरान पीयूष गोयल ने कहा था कि ‘मुद्रा योजना’ के तहत कुल मिलाकर 7,23,000 करोड़ रुपये के 15.56 करोड़ ऋण वितरित किए गए हैं। भारत भी दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां सर्वाधिक संख्‍या में युवा आबादी है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के जरिए 1 करोड़ से भी अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि आजीविका अर्जित करने में उनकी मदद की जा सके। ‘मुद्रा’, स्‍टार्ट-अप इंडिया और स्‍टैंड-अप इंडिया सहित स्‍व-रोजगार योजनाओं के जरिए युवाओं की पूरी क्षमता का उपयोग किया गया है। रोजगार चाहने वाले लोग अब रोजगार सृजित करने लगे हैं, इसकी बदौलत भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्‍टार्ट-अप हब बन गया है।