विपक्ष की मांग: 50 फीसदी ईवीएम रिजल्ट का वीवीपैट से मिलान किया जाए

विपक्षी नेताओं ने ईवीएम से कथित छेड़छाड़ को लेकर आगामी चुनावों के मद्देनजर चुनाव आयोग तक दस्तक दी है. इस मामले में अलग-अलग विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेता एक साथ आए हैं.

ईवीएम से कथित छेड़छाड़ के इस मामले के हल के लिए देशभर की 22 विपक्षी पार्टियां एकजुट हुई हैं. इन सभी विपक्षी पार्टियों इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयोग आयुक्त से मसोदे के साथ मुलाकात की.

इससे पहले ईवीएम के मसले पर 31 जनवरी और 01 फरवरी को विपक्ष की ओर से मीटिंग आयोजित की गई थी. इस मीटिंग में शामिल होने तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन, वाईएस चौधरी (तेलुगू देशम पार्टी), प्रफुल्ल पटेल (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी), एमके कनिमोझी (द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम), राम गोपाल यादव (समाजवादी पार्टी), डी राजा (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी) और टीके रंगराजन (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी) दिल्ली पहुंचे थे.

मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात के बाद गुलाम नबी आजाद ने आयोग के सामने रखे सुझाव पर चर्चा करते हुए कहा, “पिछले कुछ सालों से देखा गया है कि मतदाता कोई भी बटन दबाता है वोट बीजेपी को ही जाता है. लेकिन चुनाव आयोग कभी भी यह बता नहीं पाया कि ऐसा क्यों होता है. कम समय होने की वजह से हम यह सिफारिश नहीं कर सकते हैं कि बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएं. अभी जो ईवीएम है उसी में जहां तक हो सके पारदर्शिता लाई जाए. हमने मांग की है कि चाहे लोकसभा चुनाव या विधानसभा चुनाव. 50 प्रतिशत वीवीपैट की पर्चियों का ईवीएम के मतों से मिलान किया जाए. वीवीपैट के नतीजे को आयोग को सुरक्षित भी रखना चाहिए. ताकि टैली होना मुमकिन हो सके. और पता चले कि मशीन सही है या खराब.”

इस मामले में बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा, “हमने चुनाव आयोग के सामने सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट रखा. जिसमें सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था, ईवीएम से निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकता. उसके बाद यह बात सामने आई थी कि वीवीपैट भी होगा. 2017 में हुए उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद बसपा सुप्रीम कोर्ट गई थी और कहा था कि ईवीएम से निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकता. उस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने चुनाव आयोग ने एक एफिडेविट दे कर कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि आयोग वीवीपैट की पर्ची की गिनती करेगी. आज हमने सुप्रीम कोर्ट के उसी फैसले की याद दिलाते हुए चुनाव आयोग से पचास फीसदी वीवीपैट पर्ची की मिलान की मांग रखी है. जो आयोग का खुद का हलफनामा है.

इस मामले में सीपीआई के महासचिव और सांसद डी राजा ने कहा चुनाव आयोग के पास यह संवैधानिक ताकत है कि वह निष्पक्ष चुनाव कराए. ताकि जनता का चुनाव और ईवीएम में भरोसा बन सके. आयोग को ईवीएम की विश्वसनीयता को कायम करना ही होगा. आयोग को ईवीएम में जनता के भरोसा कायम करना होगा.

टीडीपी की तरफ से चंद्रबाबू नायडू ने कहा, “हम पूरी तरह से निष्पक्षता की मांग करते हैं और समय की कमी को देखते हुए पचास फीसदी पर्ची की गिनती कर ईवीएम से मिलान की मांग रखते हैं. सबको ईवीएम पर शक है ऐसे में चुनाव आयोग का फर्ज बनता है कि वह जनता का भरोसा कायम करे. ताकि लोकतंत्र में भरोसा बना रह सके.