सुप्रीम कोर्ट: CBI के पूर्व अंतरिम चीफ तलब, बरसे CJI- आपने कोर्ट से किया है खिलवाड़, अदालत की अवमानना की

कोर्ट ने पूर्व सीबीआई अंतरिम चीफ नागेश्वर राव को तलब किया है। कोर्ट ने कहा कि बिना अदालत की जानकारी के मुजफ्फरपुर मामले की जांच कर रहे अधिकारी को हटा दिया। यह अदालत की अवमानना है।

जनसत्ता ऑनलाइन के अनुसार बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस की जांच कर रहे सीबीआई ऑफिसर एके शर्मा के तबादले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी के पूर्व अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव को कड़ी फटकार लगाई है। एएनआई के अनुसार, सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि आपने कोर्ट से खिलवाड़ किया है। आपको भगवान ही बचाएंगे। सीबीआई के वकील ने बताया कि एम नागेश्वर राव सहित दो ऑफिसर एके शर्मा के तबादले में शामिल थे। इसके बाद जस्टिस गोगोई ने कहा, “हम इसे काफी गंभीरता से लेने जा रहे हैं। आपने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के साथ खेल किया है। भगवान ही आपको बचाएं। कभी भी सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर से न खेलें।”

कोर्ट ने कहा कि सीबीआई अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव ने अदालत को जानकारी दिए बिना ही मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस की जांच कर रहे एजेंसी के अधिकारी एके शर्मा का तबादला कर अदालत की अवमानना की है। बता दें कि जब अचानक आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटाया गया था तो नागेश्वर राव को निदेशक की कमान सौंपी गई थी। इस दौरान ही उन्होंने एके शर्मा का तबादला किया था। एके शर्मा उस समय बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस की जांच कर रहे थे।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपने पहले के आदेशों का संदर्भ दिया जिनमें सीबीआई से बिहार आश्रय गृह मामलों की जांच करने वाली टीम में शामिल अधिकारी एके शर्मा को नहीं हटाने को कहा गया था। सीबीआई निदेशक को एके शर्मा का तबादला जांच एजेंसी के बाहर करने की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के नाम बताने का निर्देश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने एके शर्मा के तबादला प्रक्रिया में शामिल सीबीआई के अन्य सभी अधिकारियों को भी 12 फरवरी को पेश होने को कहा। साथ ही तत्कालीन अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव को अवमानना का नोटिस भेजा और उन्हें भी 12 फरवरी को अपने समक्ष पेश होने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश के उल्लंघन के लिए सीबीआई अभियोजन निदेशक प्रभारी एस भासु राम को भी मौजूद रहने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन उत्पीड़न मामला बिहार से नयी दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश देते हुये कहा कि बहुत हो गया और बच्चों से इस तरह का व्यवहार नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने बिहार में मुजफ्फरपुर के अलावा 16 अन्य आश्रय गृहों के प्रबंधन पर असंतोष व्यक्त करते हुये राज्य सरकार को आड़े हाथ लिया और उसे चेतावनी दी कि उसके सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर राज्य के मुख्य सचिव को बुलाया जायेगा।

सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन उत्पीड़न कांड के मुकदमे की प्रगति पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इसे यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून के तहत मुकदमों की सुनवाई करने वाली दिल्ली की साकेत जिला अस्पताल में स्थानांतरित किया जा रहा है। पीठ ने बिहार सरकार को निर्देश दिया कि इस मामले का सारा रिकार्ड दो सप्ताह के भीतर दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने के लिये हर तरह की सहायता उपलब्ध कराये। पीठ ने यौन उत्पीड़न के इस मुकदमे की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरा करने का भी आदेश दिया।