सरकारी भूमि कब्जाने का मामला: बरेली के मेयर, प्रमुख सचिव व नगर आयुक्त से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

महापौर डॉ. उमेश गौतम पर सरकारी भूमि पर कब्जा करने का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की याचिका को हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया है।

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक महापौर डॉ. उमेश गौतम पर सरकारी भूमि पर कब्जा करने का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की याचिका को हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया है। भाजपा पार्षद विपुल लाला, पूर्व पार्षद राजेश तिवारी और मुनीष शर्मा की ओर से यह याचिका दाखिल की गई थी। प्रमुख सचिव और नगर आयुक्त को भी पार्टी बनाया है। हाईकोर्ट ने दोनों के खिलाफ नोटिस जारी किया है। मामले में अब पांच मार्च को सुनवाई होगी।

क्या है पूरा मामला

रजऊ परसपुर में नगर निगम की करीब 110 बीघा जमीन है। इस पर नगर निगम ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेट प्लांट लगाया था। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि वहां करीब 5900 वर्ग मीटर यानी करीब 9.3 बीघा भूमि पर इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी का कब्जा है। उस भूमि पर यूनिवर्सिटी का प्रशासनिक भवन, कंप्यूटर लैब और आवास बना है। इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के चेयरमैन व वर्तमान महापौर डॉ. उमेश गौतम ने 18 फरवरी, 2006 को नगर आयुक्त को पत्र भेजकर सरकारी भूमि पर कब्जे की बात स्वीकार भी की थी। बदले में उन्होंने भूमि का मूल्य या फिर उनकी पास वाली भूमि लेने की गुजारिश भी की थी। इस भूमि की कीमत कई करोड़ रुपये है। उन्होंने महापौर को नगर निगम अधिनियम की धारा 11, 25 और 83 के तहत आरोपित मानते हुए पद से हटाने या केस चलने तक महापौर पद का काम नहीं करने की मांग की है। आरोप यह भी है कि शहर में दुकानों के आगे बने डेढ़ से दो फुट के चबूतरे तोड़े जा रहे हैं, लेकिन महापौर अपने अवैध कब्जे व निर्माण को नहीं हटवा रहे।

अफसरों की जांच रिपोर्ट भी पेश की

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया है कि वर्ष 2005 सॉलिड वेस्ट मैनेजमेट प्लांट लगाने का काम जल निगम को दिया गया था। वर्ष 2006 में जल निगम ने भूमि पर इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी व अग्रसेन कॉलेज का कब्जा होने की शिकायत की। इस पर भूमि की पैमाइश हुई तो अग्रसेन कॉलेज ने भूमि छोड़ दी, लेकिन इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट के आदेश पर डीएम ने एसडीएम फरीदपुर व एसडीएम बरेली से जांच करवाई। उन्होंने मौके पर कब्जा पाया। जांच रिपोर्ट के बाद हाईकोर्ट ने रिट खारिज कर दी थी।