विचार: न्यूज़ चैनल ‘रिपब्लिक भारत’ ने अपने घृणित इरादे स्पष्ट कर दिए हैं…

राजीव मित्तल

28 साल बाद फिर फ़र्ज़ी खेल शुरू… न्यूज़ चैनल रिपब्लिक भारत ने 28 साल पहले के अयोध्या मामले को लेकर जो खबर अब दिखाई, वो न केवल फ़र्ज़ी है बल्कि शर्मनाक और नाकाबिले बर्दाश्त है..इसलिए पहले दिन से ही इस चैनल का सार्वजनिक बहिष्कार होना चाहिये क्योंकि इस चैनल ने अपने घृणित इरादे स्पष्ट कर दिए हैं..

अयोध्या में गोलीकांड की खबर 28 साल पहले बहुत ही गलत ढंग से पेश करने वालों में प्रभाष जोशी और रामनाथ गोयनका का जनसत्ता अख़बार सबसे आगे की कतार में था..इस खबर का चश्मदीद गवाह हूँ.. जब यह खबर अयोध्या में मौजूद जनसत्ता के स्टिंगर किसी तिवारी ने भेजी तो मैं चंडीगढ़ जनसत्ता में रात की ड्यूटी में था..

वो बरगलाने वाली खबर दिल्ली जनसत्ता ने प्रभाष जी की नाक के नीचे जस की तस छापी जबकि चंडीगढ़ जनसत्ता में यह खबर पूरी तरह एडिट कर तथ्यों के आधार पर छापी गयी थी..

खबर अयोध्या के गोलीकांड पर थी जिसमें मुलायम सरकार पर अयोध्या में साधू संतों के खून की नदियां बहाने का ज़िक्र करीब पांच पन्नों में था..तिवारी के हाथ से लिखी इस खबर को एडिट करने में पसीना आ गया था, जिसमें सिर्फ और सिर्फ पुलिस की गोली से मरे साधू संतों की लाशों के ढेर और नालियों में बह रह रहे खून का जुगुप्सा जगाने वाला शब्दों का भण्डार था..बाकि उस अति विशाल खबर में तथ्य थे ही नहीं जिसे किसी तरह सिंगिल कॉलम की बना कर छापी थी..

दिल्ली जनसत्ता ने वो खबर पांच कॉलम में बगैर एडिट किये इसलिए छापी थी कि जनसत्ता के अखिल भारतीय ब्यूरो चीफ हरिशंकर व्यास और उनके ही रखे गए मंदिर मस्जिद मामलों के रिपोर्टर हेमंत शर्मा की यही मंशा थी कि मुलायम सरकार को नरसंहारी साबित कर किसी तरह उसे हटवा कर उप्र में भाजपा की सरकार लायी जाये..हेमंत शर्मा का मंदिर प्रेम तो सुविख्यात है..

यह खेल उन्हीं पत्तों से खेला गया, जिन पत्तों से राजीव गांधी को वीपी सिंह के जरिए बोफर्स में फंसा कर केंद्र को सत्ता से 1989 के चुनावों में पदच्युत किया गया था..उस घृणित खेल को प्रभाष जोशी के जनसत्ता और अरुण शौरी के इन्डियन एक्सप्रेस ने अपने आका रामनाथ गोयनका और राष्ट्रीय सेवक संघ के इशारे पर पूरे दो साल 87 से 89 तक जम कर खेला था..वही काम 28 साल बाद अर्णब का चैनल कर रहा है…

साभार: वरिष्ठ पत्रकार राजीव मित्तल की एफबी वॉल से.