सहयोगियों के बढ़ते विरोध के चलते नागरिकता (संशोधन) विधेयक और तीन तलाक बिल से हाथ खींच सकती है बीजेपी!

बीजेपी अपने सहयोगी दलों की नाराजगी को देखते हुए नागरिकता (संशोधन) विधेयक और तीन तलाक बिल पर अपने बढ़ते कदम रोक सकती है।

एनडीए के सहयोगी दलों द्वारा बढ़ते दबाव की वजह से केंद्र सरकार तीन तलाक और नागरिकता (संशोधन) विधेयक को संसद से पारित कराने का इरादा फिलहाल टाल सकती है। क्योंकि, जिस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं उसके मद्देनज़र पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इन दोनों बिल के संबंध में यथा स्थिति बरकरार रखेगी। ‘द संडे एक्सप्रेस’ में कोमी कपूर ने लिखा है कि एनडीए के भीतर तीन तलाक और नागरिकता (संशोधन) बिल को लेकर मतभेद है। लिहाजा, लोकसभा चुनाव को देखते हुए सरकार इन्हें पारित कराने का मंसूबा छोड़ सकती है। क्योंकि, पिछले सप्ताह राज्यसभा की बिजनस एडवाइजरी कमेटी के समक्ष ये दोनों ही बिल पेश नहीं किए गए हैं। ऊपर से संसद की कार्यवाही 13 फरवरी तक ही चलेगी। ऐसे में काफी कम समय बचा है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अगले सप्ताह राजधानी दिल्ली से बाहर रहेंगे। ऐसे में नागरिकता (संशोधन) बिल और तीन तलाक बिल को पारित कराना मुमकिन नहीं होगा। हालांकि, आखिरी पल में हार्ड एंड फास्ट एक्शन लेकर मोदी सरकार ने सभी को चौंकाया जरूर है। इसके पहले सामान्य वर्ग के गरीब तबके को 10 फीसदी आरक्षण देने के मामले में भी सरकार ने अचानक फैसला लिया और सदन की कार्यवाही के आखिरी वक्त में इस बिल को पेश किया।

गौरतलब है कि एनडीए में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। जेडीयू तीन तलाक और नागरिक (संशोधन) विधेयक पर सरकार के साथ खड़ी नहीं है। वहीं, शिवसेना ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह राज्यसभा में नागरकि (संशोधन) विधेयक का विरोध करेगी। ऐसे में लोकसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ी बीजेपी शायद ही अपने सहयोगियों को नाराज करके किरकिरी मोल ले। क्योंकि, आगामी चुनाव में बीजेपी को साथियों की जरूरत अनिवार्य हो चुकी है। तमाम सर्वे रिपोर्ट में बात साफ हुई है कि बीजेपी बिना सहयोगी दलों के बाजी नहीं मार सकती। यही वजह है कि सहयोगी दल भी लोकसभा चुनाव में अपनी डिमांड मजबूत से पेश कर रहे हैं।