नागरिकता संशोधन विधेयक: पूर्वोत्तर के दो बीजेपी शासित राज्यों सहित सभी राज्यों ने किया कड़ा विरोध

Guwahati: Activists participate in a torch light march in protest against Citizenship (Amendment) Bill, 2016, in Guwahati, Wednesday, Jan 9, 2019. (PTI Photo) (PTI1_9_2019_000201B)

नागरिकता संशोधन विधेयक पर रार बढ़ती जा रही है. एक के बाद एक पूर्वोत्तर राज्य इसके विरोध में उतर रहे हैं. अब पूर्वोत्तर के दो बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस विधेयक का खुलकर कर विरोध किया है.

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और मणिपुर के एन बीरेन सिंह ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह से अपील की है कि इसे राज्यसभा में पारित ना किया जाए.

बीजेपी के दोनों मुख्यमंत्रियों ने 30 मिनट की बैठक के दौरान गृह मंत्री को पूर्वोत्तर की मौजूदा स्थिति के बारे में अवगत कराया. उन्होंने गृह मंत्री को बताया कि वहां इस विधेयक के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

एक अधिकारी ने बताया कि दोनों मुख्यमंत्रियों ने गृह मंत्री से अनुरोध किया कि पूर्वोत्तर के लोगों को नागरिकता संशोधन विधेयक पर राजी करने से पहले इसे पारित नहीं कराया जाए. साथ ही उन्होंने पूर्वोत्तर के लोगों की सांस्कृतिक एवं भाषाई पहचान के संरक्षण की भी मांग की.

अधिकारी ने बताया कि गृहमंत्री ने मुख्यमंत्रियों को चिंता न करने को कहा. उन्होंने आश्वासन दिया कि पूर्वोत्तर के मूल निवासियों के अधिकारों को कमजोर नहीं किया जाएगा.

इस विधेयक के कानून बनने के बाद, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिलने में आसानी होगी. इनमें हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को शामिल किया गया है.

इस विधेयक के प्रावधानों में 12 साल की बजाय महज छह साल भारत में गुजारने और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता मिल सकेगी.

इस विधेयक को शीतकालीन सत्र के दौरान आठ जनवरी को लोकसभा ने पारित कर दिया था और राज्यसभा में इसे मंजूरी मिलना अभी बाकी है.

असम सहित लगभग सभी पूर्वोत्तर राज्यों में इस विधेयक का कड़ा विरोध किया जा रहा है.