पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीनने का भारत को होगा नुकसान, पड़ोसी मुल्क पर खास असर नहीं

Attari: Border Security Force Commandant Mukund Kumar Jha offer sweets to Pakistani Border Wing Commander Usman Khalid on the occasion of 70th Republic Day at the India-Pakistan Wagah border, at Attari near Amritsar, Saturday, Jan 26, 2018. (PTI Photo)(PTI1_26_2019_000044B)

पुलवामा हमले के बाद भारत की तरफ से पाकिस्तान को जवाब देने के नाम पर उससे मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा छीन लिया गया है. लेकिन इसके छीने जाने से आपसी ट्रेड पर कितना असर पड़ेगा या पाकिस्तान को इससे कितना नुकसान होगा. ये एक मौजूं सवाल है.

अंग्रेजी वेबसाइट टेलीग्राफ ने इस बात की आंकड़ों और तथ्यों में पड़ताल की है. इसके मुताबिक दोनों देशों के बीच व्यापार बहुत कम पैमाने पर होता है. 2017-18 में ये महज 2.4 बिलियन डॉलर रहा. ये भारत के कुल वैश्विक व्यापार का मात्र 0.31 फीसदी था. पाकिस्तान के मामले में ये उसके कुल व्यापार का 3.2 फीसदी था.

भारत ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को 1996 में एमएफएन का दर्जा दिया था. इस दर्जे का कोई बहुत बड़ा महत्व भी नहीं है. इसका मतलब सिर्फ इतना है कि उसके निर्यातक उन्हीं शर्तों पर भारत को निर्यात कर सकते हैं जिन पर डबल्यूटीओ के दूसरे देश करते हैं. ये इसे कोई विशेषाधिकार नहीं देता.

जेएनयू में इकॉनॉमिक स्टडी के प्रोफेसर विश्वजीत धर कहते हैं, “ये कदम एक मजबूत संकेत जरूर है, लेकिन ये सिर्फ सांकेतिक है. भारत और पाकिस्तान के बीच वैसे भी ज्यादा व्यापार होता नहीं है.”

बहरहाल सांकेतिक रूप से इसका महत्व जरूर है, क्योंकि एक बार दिया गया दर्जा अमूमन वापस नहीं लिया जाता है. वैसे पाकिस्तान ने भारत को कभी एमएफएन का दर्जा नहीं दिया.

डबल्यूडीओ के सभी हस्ताक्षरकर्ता देशों का ये दायित्व है कि वे व्यापार के मामले में आपस में एक समान व्यवहार करें. एमएफएन के नियमों के मुताबिक उनको अपने देश में वस्तुओं के आवागन पर टैक्स के मामले में भेदभाव नहीं करना होता है.

लेकिन पाकिस्तान लंबे समय भारत को एमएफएन का दर्जा देने से इनकार करता रहा है. इसके पीछे पाकिस्तान के स्थानीय व्यापारियों का डर भी है. वो अक्सर इसका विरोध करते हैं. उनको इससे अपने व्यापार के तबाह हो जाने का डर है.

इसके पीछे एक और रोचक बात है. कुछ समीक्षकों का मत है कि एमएफएन का उर्दू में मतलब सबसे पसंदीदा देश है, इसके चलते आम पाकिस्तानी भारत को इस तरह का दर्जा देना पसंद नहीं करते हैं.

इसके परिणाम स्वरूप पाकिस्तान ने भारत से करीब 1,209 उत्पादों के आयात पर रोक लगा रखी है. कुछ ऐसी चीजें जो ये भारत से आयात करता है उस पर भी काफी ज्यादा टैक्स लगा रखा है. जिन चीजों के आयात पर पाकिस्तान ने रोक लगा रखी है उनमें टेक्सटाइल, गारमेंट, दवाईयां, प्लास्टिक और पॉलिमर, ऑटो पार्टस आदि हैं.

इन सबके बावजूद हाल के सालों में दोनों देशों के बीच व्यापार में बढ़त दर्ज की गई है. 2017-18 में ये 6 फीसदी बढ़कर 2.4 बिलियन डॉलर पर पहुंच गई. इनमें भारत की तरफ से 1.9 बिलियन डॉलर का सामान पाकिस्तान को बेचा गया, जबकि पाकिस्तान की ओर से 500 बिलियन डॉलर की चीजें भारत आईं.

आर्थिक मामलों की जानकार प्रोफेसर निशा तनेजा कहती हैं, “पाकिस्तान से एमएफएन का दर्जा वापस लेने से व्यापार पर बहुत थोड़ा असर होगा, क्योंकि इनके बीच व्यापार बहुत कम ही होता है.”

इसका सबसे बड़ा असर सीमेंट के आयात पर होने वाला है, क्योंकि भारत पाकिस्तान से बड़ी मात्रा में सीमेंट का आयात करता है. पाकिस्तान से आई सीमेंट की सबसे ज्यादा खपत उत्तरी भारत में होती है. ये भारतीय सीमेंट से 10-15 फीसदी सस्ती होती है.

इसका मतलब ये हुआ कि इस कदम से इस उद्योग को कुछ फायदा संभव है. आंकड़ों के मुताबिक 2017-18 में भारत ने कुल 16.82 लाख मीट्रिक टन सीमेंट का आयात किया. इसमें से करीब 76 फीसदी हिस्सा पाकिस्तान से आयात किया गया था.

प्रोफेसर धर कहते हैं, “पाकिस्तान भारत के इस कदम के बदले में उसके अपने देश में आयात पर प्रतिबंध लगा सकता है. ऐसा पहले भी होता रहा है. इससे व्यापार पर कोई बहुत बड़ा असर नहीं होगा, लेकिन ये व्यापार को तीसरे देश के माध्यम से होने के लिए बढ़ावा देगा.”