चुनाव के समय गुल रह सकती है उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की बिजली, सरकार ने नहीं चुकाया है पैसा

विभिन्न राज्यों द्वारा बिजली कंपनियों के 14,600 करोड़ रुपये का बकाया नहीं चुकाया जा सका है। पैसे नहीं होने की वजह से बिजली कंपनियों के सामने कोयले की कमी और रेल द्वारा माल ढुलाई का संकट खड़ा हो गया है।

जनसत्ता ऑनलाइन के मुताबिक लोकसभा चुनाव के दौरान एक तरफ जहां गर्मी का प्रकोप हावी रहेगा, वहीं बिजली की किल्लत भी सत्ताधारी दलों की मुश्किलें बढ़ा सकती है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक देश के विभिन्न राज्यों द्वारा बिजली कंपनियों के 14,600 करोड़ रुपये का बकाया नहीं चुकाया जा सका है। पैसे नहीं होने की वजह से बिजली कंपनियों के सामने कोयले की कमी और रेल द्वारा माल ढुलाई का संकट खड़ा हो गया है।

बिजली तैयार करने वाली कंपनियों ने इस मामले में केंद्र सरकार को दखल देने के लिए कहा है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द राज्यों के तमाम उपक्रमों से बिजली का भुगतान कराए, ताकि वे समय पर बिजली तैयार करने के अन्य संसाधन समय पर जुटा सकें। इकोनॉमिक्स टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि समय पर बिजली का भुगतान नहीं करने की वजह से 15,000 मेगावाट क्षमता वाले थर्मलपावर प्लांट पर काफी उल्टा असर पड़ा है। कंपनियों के सामने बिजली पैदा करने के लिए पैसों की कमी हो गई है। पैसों की कमी की वजह से कोयला और रेल द्वारा माल ढुलाई का खर्चा नहीं वहन हो पा रहा है। क्योंकि, इसके लिए एडवांस पेमेंट की जरूरत होती है।

बिजली कंपनियों की इस चिंता काफिलहाल कोई समाधान नज़र नहीं आ रहा है। बिल भुगतान को लेकर तमिलनाडु पहले ही अपने हाथ खड़े कर चुका है। उसका कहना है कि वह अपने राज्य में खर्च हुए बिजली बिल का पूर्ण भुगतान नहीं कर सकता। तमिलनाडु के अलावा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के पास सबसे ज्यादा बिजली खर्च का बकाया है। बिजली कंपनियों ने ऊर्जा मंत्री आरके सिंह को एक पत्र लिखकर बकाया धनराशि के भुगतान करने के लिए कहा है।