वायरल वीडियो: वे पांच सवाल जो सीएम मोदी ने पूछे थे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से, अब लोग मांग रहे पीएम मोदी से उनके जवाब

जो आपने अतीत में किया है, वह कभी न कभी आपके खुद के सामने वापस आता ही है। ऐसा ही हो रहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ, जिन्होंने पीएम बनने से पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर आतंकवाद कोलेकर तीखे बाण छोड़े थे।

पुरानी हिंदी फिल्म का गाना है, ‘आदमी जो कहता है…, जिंदगी भर वह सदाएं पीछा करती हैं…’ जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमला होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कही बातें ही उनका पीछा करने लगी हैं। पुलवामा हमले में एक आत्मघाती आतंकी ने 49 सीआरपीएफ जवानों की जान ले ली।

प्रधानमंत्री को उनकी पूर्व में कही बातों की सदाएं सुनाई जा रही हैं। ऐसे ही एक वीडियो में नरेंद्र मोदी को दिखाया गया है कि कैसे वह आतंकवाद के मुद्दे पर पूर्व की मनमोहन सिंह सरकार को शीशा दिखाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से 5 सवाल पूछे थे। यह सवाल थे:

मुझे जवाब दीजिए कि ये जो आतंकवादी है, उसके पास शस्त्र और गोला-बारूद कहां से आता है, वह तो विदेश की धरती से आता है। सीमाएं सम्पूर्ण रूप से आपके कब्जे में हैं। सीमा सुरक्षा बल आपके कब्जे में हैं।

दूसरा सवाल पूछा – आतंकवादियों के पास धन आता है, हवाला से आता है, पूरा मनी ट्रांजैक्शन का कारोबार भारत सरकार के कब्जे में है, आरबीआई के अंडर में है, बैंकों के माध्यम से होता है। क्या प्रधानमंत्री इतनी निगरानी नहीं रख सकते कि यह जो धन विदेश आकर आतंकवादियों के हाथ में जाता है, आपके हाथ में है, आप उसे क्यों नहीं रोकते हैं?

तीसरा सवाल – विदेशों से घुसपैठिए आते हैं, घुसपैठिए आतंकवादियों के रूप में आते हैं, आतंकवादी घटनाएं करते हैं, भाग जाते हैं, प्रधानमंत्री जी आप बताइए, सीमाएं आपके हाथ में हैं, बीएसएफ-सेना आपके हाथ में है, कोस्टल सिक्यूरिटी आपके हाथ में है, नेवी आपके हाथ में है, यह विदेश से घुसपैठिए कैसे भारत में घुस जाते हैं।

चौथा सवाल – सारा कम्यूनिकेशन भारत सरकार के अंडर में है, कोई फोन पर बात करता है, ईमेल भेजता है, भारत सरकार उसे इंटरेप्ट (इंटरसेप्ट) कर सकती है। इंटरसेप्ट करके जानकारियां पा सकती हैं, कि आतंकवादी गतिविधि में कौन सा कम्यूनिकेशन चल रहा है और, आप उसे रोक सकते हो। मैं पूछना चाहता हूं प्रधानमंत्री से, इस विषय में आपने क्या किया है।

पांचवां सवाल – विदेशों में जो आतंकवादी भाग चुके हैं, विदेशों में बैठकर हिंदुस्तान में आतंकवाद की घटनाएं अंजाम दे रहे हैं, उनको प्रत्यरोपण (प्रत्यर्पण) के द्वारा हिंदुस्तान में लाने का हमें अधिकार होता है। आपकी विदेश नीति में वह क्या ताकत है।

नरेंद्र मोदी ने आगे कहा था कि, “एक बार इन पांचों मुद्दों पर कुछ करके दिखाइए, आतंकवाद जड़-मूल उखड़ जाएगा।”

यह वीडियो वरिष्ठ पत्रकार और फिल्ममेकर विनोद कापड़ी ने अपने ट्विटर पर शेयर किया है। कापड़ी ने इसी वीडियो के आधार पर नरेंद्र मोदी से सवाल पूछा है कि, “प्रधानमंत्री जी, आतंकवाद कैसे रोकना है, जब आपको इतना सब बहुत पहले से पता था तो पठानकोट, उरी के बाद अब पुलवामा क्यों हुआ? देश आज आपसे पूछ रहा है।“

इसके अलावा भी पुलवामा में हुए आतंकी हमले को लेकर कई सवाल पूछे जा रहे हैं।

रॉयटर की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2016 की कथित सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान नॉर्दर्न कमांड का नेतृत्व करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डी एस हुड्डा ने कहा है कि मिलिट्री ग्रेड का 150-200 किलो विस्फोटक सीमा पार से लाना असंभव है। तो सवाल है कि आखिर ‘ताकतवर और मजबूत’ मोदी सरकार इसे रोकने में कैसे नाकाम हो गई? और आखिर सिर्फ 21 साल आत्मघाती आतंकी इसे हासिल कैसे कर पाया?

यूं तो पुलवामा हमला होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरी केंद्र सरकार और बीजेपी नेता इसका राजनीतिक लाभ लेने की फिराक में लग गए, लेकिन सर्वदलीय बैठक में पीएम की गैरमौजूदगी कई सवाल खड़े करती है।
भले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय कह रहा है कि सीआरपीएफ को एयरलिफ्ट की इजाजत न देने की खबरे झूठी हैं, लेकिन सवाल तो इतनी बड़ी संख्या में जवानों के सड़क के रास्ते लेने पर उठ ही रहा है।
इसके अलावा सोशल मीडिया पर तमाम यूजर्स पुलवामा हमले को लेकर बीजेपी के दोहरे बयानों पर सवाल उठा रहे हैं।

साभार: नवजीवन से