लोकसभा चुनाव 2019: अरुणाचल प्रदेश बीजेपी छोड़ कांग्रेस में जाने वाले नेताओं की लगी है झड़ी, पूर्व सीएम तक छोड़ चुके हैं पार्टी

पिछले साल दिसंबर से लेकर अब तक करीब 19 राजनेताओं ने विपक्षी दल कांग्रेस का दामन थाम लिया है। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व मंत्री और विधायकों के अलावा स्थानीय दिग्गज भी शामिल हैं। अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल होने वाले नेताओं की फेहरिस्त लंबी है।

अरुणाचल प्रदेश में सत्ताधारी दल बीजेपी की स्थिति कुछ ठीक दिखाई नहीं दे रही है। पिछले साल दिसंबर से लेकर अब तक करीब 19 राजनेताओं ने विपक्षी दल कांग्रेस का दामन थाम लिया है। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व मंत्री और विधायकों के अलावा स्थानी दिग्गज भी शामिल हैं। कांग्रेस में शामिल होने वाले अधिकांश नेता बीजेपी से हैं, जबकि दो का ताल्लुक नेशनल पिपुल्स पार्टी (एनपीपी) से है। गौरतलब है कि इसी वर्ष लोकसभा चुनाव के साथ ही अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव संपन्न कराए जाएंगे।

इस महीने जिन्होंने कांग्रेस के लिए बीजेपी को अलविदा कहा है उनमें तातर किपा, अतुम वेली और जेम्स एल वांगलट शामिल हैं। कांग्रेस का दावा है कि इनमें से हर नेता के पास 2000 कार्यकर्ताओं का समर्थन है। पिछले महीने जनवरी में पूर्व मुख्यमंत्री गेगोंग अपांग ने बीजेपी का साथ छोड़ दिया। उन्होंने आरोप लगाए कि बीजेपी अब सत्ता लोलुपता का अड्डा बन गई है। इस बीच प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख तकम संजय ने कहा, “सभी स्तर के नेता बीजेपी का साथ छोड़ कांग्रेस की ओर भाग रहे हैं। बीजेपी नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर जोर दे रही है। लिहाजा, लोग गुस्से में हैं और बीजेपी को बाहर का रास्ता दिखाएंगे।”

वैसे देखा जाए तो किपा, वेली और वांगलट के लिए कांग्रेस में घर-वापसी है। क्योंकि, ये तीनों इससे पहले कांग्रेस की सरकार में मंत्री रह चुके थे। लेकिन, पार्टी में कुछ मतभेदों की वजह से बीजेपी में शामिल हो गए थे। अरुणाचल के पूर्व गृहमंत्री वांगलट ने कहा कि उन्होंने 2009 में कांग्रेस का साथ इसलिए छोड़ दिया, क्योंकि उनका विधानसभा टिकट पार्टी ने काट दिया था। उन्होंने 2014 में बीजेपी जॉइन किया लेकिन विधानसभा चुनाव अपने कांग्रेस प्रतिद्वंदी से हार गए।

वहीं, बीजेपी का कहना है कि उनका साथ उन्हीं नेताओं ने छोड़ा है, जिन्हें टिकट नहीं मिलने का डर सता रहा है। अरुणाचल प्रदेश के बीजेपी प्रमुख तापिर गाव ने कहा, “वे (बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल होने वाले) अपने विधानसभा क्षेत्र में सामाजिक रुप से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। लेकिन राजनीतिक तौर पर उनकी कुछ भी भूमिका नहीं है।”