सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से ईवीएम सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स को लेकर दायर याचिका पर मांगा जवाब

उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग से ईवीेएम से जुड़ी एक याचिका पर जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को चुनाव आयोग से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम), मतदाता सत्यापन पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) और ईटीएस को लेकर दायर याचिका पर जवाब मांगा है। अदालत ने चुनाव आयोग से उस याचिका का जवाब मांगा है जिसमें कहा गया था कि सरकार ईवीएम, वीवीपीएटी और ईटीएस से जुड़े सभी सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स का स्वतंत्र रूप से ऑडिट करे।

इस याचिका में सरकार से कहा गया था कि वह सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के सोर्स कोड की भी स्वतंत्र तौर पर ऑडिट करे। अब इस याचिका पर उच्चचम न्यायालय ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के सोर्स कोड को हैक करने को लेकर पिछले दिनों लंबी बहस चली है। कई हैकर्स ने ईवीएम हैकिंग का दावा भी किया था। अमेरिका के एक साइबर एक्सपर्ट का भी कहना था कि भारत में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम मशीन आसानी से हैक हो सकती है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस सभी आरोपों को खारिज कर दिया था और ईवीएम को सुरक्षित बताया था।

उठती रही है बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग
साल 2009 में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी ईवीएम को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं। आडवाणी उस वक्त विपक्ष के नेता थे और उन्होंने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की थी। उस वक्त महाराष्ट्र और तीन दूसरे राज्यों में चुनाव होने थे और लालकृष्ण आडवाणी ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की थी।

भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद विपक्ष भी कई बार ईवीएम को लेकर सवाल उठा चुका है। 2017 में भाजपा के यूपी विधानसभा चुनाव जीतने पर भी विपक्ष ने ईवीएम को लेकर सवाल खड़े किए थे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी ईवीएम के गलत इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं।