पुलवामा हमले का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही सरकार? इन पांच बातों से खुद लगाइए अंदाज़ा

पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्‍मघाती आतंकी हमले के बाद इसका राजनीतिक लाभ लेने की भी कोशिश शुरू हो गई है। मोदी सरकार की ओर से भी ऐसे संकेत मिल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर अमित शाह तक अपनी रैलियों में पुलवामा हमले का जिक्र कर चुके हैं।

जनसत्ता ऑनलाइन के मुताबिक जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा जिले के अवंतिपुरा में आत्‍मघाती आतंकी हमले में अर्द्धसैनिक बल सीआपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद भारत और पाकिस्‍तान के बीच तल्‍खी बेहद बढ़ गई है। भारत ने अंतरराष्‍ट्रीय मोर्चे पर पड़ोसी देश को अलग-थलग करने का अभियान छेड़ चुकी है। इस बीच, लोकसभा चुनावों के चलते इसको लेकर घरेलू माहौल भी गरमा गया है। हमले के बाद राजनीतिक दलों ने इस मसले को न भुनाने की बात कही थी, लेकिन ताबड़तोड़ हो रही चुनावी रैलियों में नेताओं के भाषणों को सुनकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बात पर कितना अमल किया गया है। विपक्ष ही नहीं सरकार की ओर से भी पुलवामा हमले पर लगातार बयानबाजी की जा रही है। इन पांच बातों से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार कैसे पुलवामा आतंकी हमले का राजनीतिक इस्‍तेमाल करने का प्रयास कर रही है।

रैलियों में पुलवामा हमले का उल्‍लेख कर चुके हैं पीएम मोदी:

लोकसभा चुनाव में अब कुछ ही हफ्तों का वक्‍त शेष है। ऐसे में केंद्र में सत्‍तारूढ़ बीजेपी के साथ विपक्षी दलों के नेता भी ताबड़तोड़ चुनावी रैलियां कर रहे हैं। बीजेपी की ओर से पीएम मोदी ने खुद प्रचार अभियान की कमान संभाल रखी है। वह अपनी जनसभा में लगातार पुलवामा आत्‍मघाती हमले का जिक्र कर रहे हैं। हमले के बाद पीएम मोदी ने वन्‍दे भारत एक्‍सप्रेस ट्रेन का उद्घाटन किया था, जिसमें उन्‍होंने सीआरपीएफ के जवानों पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा था कि लोगों का खून खौल रहा है और वह इसे भली-भांति समझते हैं। पीएम मोदी ने 17 फरवरी को बिहार के बरौनी में भी एक जनसभा को संबोधित किया था। पुलवामा हमले का संदर्भ देते हुए उन्‍होंने कहा था, ‘मैं अनुभव कर रहा हूं कि आपके और देशवासियों के दिल में कितनी आग है। जो आग आपके दिल में है, वही आग मेरे दिल में भी है।’

पाकिस्‍तान का पानी रोकने की घोषणा:

मोदी कैबिनेट के वरिष्‍ठ मंत्री नितिन गडकरी ने 21 फरवरी को पाकिस्‍तान का पानी रोकने का ऐलान किया था। उन्‍होंने ट्वीट कर कहा था कि भारत के हिस्‍से का पानी पाकिस्‍तान जा रहा है, जिसे अब रोक दिया जाएगा। दरअसल, इस कदम को पुलवामा हमले के बाद पड़ोसी देश के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर पेश करने की कोशिश की गई। हालांकि, गडकरी के बयान में कुछ भी नया नहीं है। उरी हमले के बाद भी इस तरह का फैसला लिया गया था।

ABVP ने निकाली तिरंगा यात्रा, किए कार्यक्रम:

बीजेपी की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भी पुलवामा आतंकी हमले के बाद सक्रिय हो गया है। ABVP के कार्यकर्ताओं ने शिमला (हिमाचल प्रदेश) में 150 फीट तिरंगे के साथ यात्रा निकाली। प्रदेश के ऊना में भी हमले के विरोध में प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा पूर्वोत्‍तर राज्‍य त्रिपुरा में भी ABVP के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

अमित शाह रैलियों में उठा रहे पुलवामा का मुद्दा:

लोकसभा चुनाव प्रचार के सिलसिले में बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह लगातार रैलियां कर रहे हैं। वह कई जनसभाओं में पुलवामा हमले का मुद्दा उठा चुके हैं। असम में 17 फरवरी को एक रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा था, ‘जवानों की शहादत को बेकार नहीं जाने दिया जाएगा, क्‍योंकि केंद्र में कांग्रेस की नहीं बीजेपी की सरकार है। असम को दूसरा कश्‍मीर नहीं बनने देंगे।’

मंत्रियों को शहीदों के अंतिम संस्‍कार में शामिल होने का निर्देश:

प्रधानमंत्री कार्यालय ने पुलवामा में शहीद हुए जवानों के अंतिम संस्‍कार में शामिल होने वाले केंद्रीय मंत्रियों की बकायदा लिस्‍ट तैयार की थी। इसके अलावा बीजेपी शासित राज्‍यों के मुख्‍यमंत्री और मंत्रियों ने शहीदों के अंतिम संस्‍कार में शिरकत की थी। कुछ राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों ने तो शहीदों के शव को कंधा तक भी दिया था।