मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड: सुनवाई से पहले गायब हुईं सात लड़कियां

मोकामा बालिका गृह से सात लड़कियां गायब हो गई हैं. इनमें चार मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की पीड़िता हैं. मई 2018 में मुजफ्फरपुर बालिका गृह के बंद होने के बाद चारो पीड़िता लड़की को मोकामा के इस बालिका गृह में रखा गया था.

मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में 23 फरवरी को आरोपी की पेशी होनी थी. दिल्ली की साकेत कोर्ट में मामले की सुनवाई हो रही है.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक पुलिस के अनुसार रात दो बजे घटना को अंजाम दिया गया. एक अधिकारी ने बालिका गृह की ग्रिल कटी हुई देखी. पुलिस ने शक जाहिर किया है कि संकरे रास्ते से लड़कियों का भाग पाना मुश्किल है. बालिका गृह के कर्मचारियों ने घटना पर टिप्पणी करने से मना कर दिया है. कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है. पटना के डीएम और एसएसपी बालिका गृह पहुंच गए हैं.

एक पुलिस अधिकारी ने बालिका गृह प्रबंधन से असहयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने गोपनीय तरीके से काम किया और कई बार सरकार की महिला प्रतिनिधियों को भी लड़कियों से मिलने नहीं दिया गया. सरकार ने बालिका गृह प्रबंधन को दुर्व्यवहार से पीड़ित लड़कियों के लिए नियमित परामर्श सत्र चलाने को कहा था.

बालिका गृह से सात लड़कियों के फरार होने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है. जिलाधिकारी कुमार रवि, एसएसपी गरिमा मलिक , ग्रामीण एसपी सुनील कुमार ,एएसपी लिपि सिंह समेत अन्य अधिकारियों की टीम मोकामा पहुंच चुकी है. यह बालिका गृह नाजरथ मिशनरी द्वारा संचालित है और नाजरथ अस्पताल परिसर में स्थित है.

सामाजिक कल्याण विभाग के निदेशक राजकुमार ने पीटीआई-भाषा को बताया, “मोकामा स्थित आश्रय गृह से आज सुबह 3 बजे से साढ़े तीन बजे के बीच सात नाबालिग लड़कियां भाग गईं. यहां उनके हिंसक व्यवहार का इलाज चल रहा था.”

राजकुमार ने कहा कि वह इस स्थिति में नहीं हैं कि बता सकें कि लड़कियां कैसे भागीं.

यह पूछे जाने पर कि क्या सात में से पांच लड़कियों को मुजफ्फरपुर के आश्रय गृह से लाया गया था, जिसका संचालन 34 लड़कियों के कथित बलात्कार और यौन उत्पीड़न के आरोपी ब्रजेश ठाकुर का एक एनजीओ कर रहा है. कुमार ने कहा, “मुझे ठीक से पता नहीं है. मैं आश्रय गृह पर पहुंचने के बाद ही कुछ कह सकूंगा.”

मुजफ्फरपुर बालिका गृह पिछले साल मई से बंद पड़ा है. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस की सोशल ऑडिट में बिहार के 17 बालिका गृह की लड़कियों को शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने की बात सामने आई थी.