“सूचना” है EVM, 10 रुपये की RTI लगाकर चुनाव आयोग से मांग सकते हैं: केंद्रीय सूचना आयोग

केन्द्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा है कि सूचना का अधिकार कानून के तहत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) ‘‘सूचना’’ है और आवेदक दस रुपये का भुगतान करके चुनाव आयोग से इसकी मांग कर सकता है।
चुनाव आयोग ने कहा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) ‘‘सूचना’’ है

केन्द्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा है कि सूचना का अधिकार कानून के तहत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) ‘‘सूचना’’ है और आवेदक दस रुपये का भुगतान करके चुनाव आयोग से इसकी मांग कर सकता है। इसका मतलब है कि चुनाव आयोग को ईवीएम की मांग करने वाले आरटीआई आवेदन का जवाब देना है। आयोग इसे उपलब्ध करा सकता है या कानून की धाराओं के तहत मिली छूट का हवाला देकर इसे उपलब्ध कराने से मना कर सकता है।

एक अनोखे आरटीआई आवेदन पर निर्णय सुनाते हुए मुख्य सूचना आयुक्त सुधीर भार्गव ने हाल में कहा था कि मशीन ‘‘सूचना’’ की परिभाषा के तहत आती है और ईसीआई से इसकी मांग की जा सकती है।

इस आवेदन में आवदेनकर्ता ने चुनाव आयोग से ईवीएम की मांग की थी। चुनाव आयोग ने आवेदन को खारिज करते हुए कहा था कि ईवीएम ‘‘सूचना’’ की परिभाषा के तहत नहीं आती है। आवेदनकर्ता रजाक खान हैदर ने चुनाव आयोग के उस जवाब से असंतुष्ट होकर इस दलील के साथ सीआईसी का रुख किया था कि आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (एफ) और 2 (आई) के अनुसार ‘सूचना’ और ‘रिकार्ड’ की परिभाषा में किसी लोक प्राधिकार द्वारा रखे गये ‘कोई मॉडल या कोई नमूना’ शामिल हैं और उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा उसके आवेदन को खारिज किये जाने को गलत बताया था।

आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (एफ) रिकॉर्ड, दस्तावेज, मेमो, ई-मेल, राय, सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, आदेश, लॉगबुक, अनुबंध, रिपोर्ट, कागजात सहित किसी भी रूप में किसी भी सामग्री के रूप में ”सूचना” को परिभाषित करती है। किसी भी इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे गए नमूने, मॉडल, डाटा सामग्री और किसी भी निजी निकाय से संबंधित जानकारी जिसे किसी भी अन्य कानून के तहत सरकारी प्राधिकरण द्वारा प्रदान किया जा सकता है। चुनाव आयोग के प्रतिनिधि ने स्वीकार किया था कि मशीन के मॉडल और नमूने उसके पास उपलब्ध हैं लेकिन ये केवल प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए रखे गये हैं न कि आम लोगों को देने के लिए।

सूचना का अधिकार कानून के तहत ईवीएम उपलब्ध करवाने की आरटीआई को खारिज किये जाने के लिए बिना शर्त माफी मांगते हुए चुनाव आयोग के प्रतिनिधि इस बात पर सहमत थे यह गलत था लेकिन साथ ही उन्होंने दोहराया कि ईवीएम सूचना की परिभाषा के तहत नहीं आता है और इस दलील को भार्गव ने खारिज कर दिया। सीआईसी ने कहा, ‘‘ईवीएम जो सामग्री के रूप में चुनाव आयोग के पास उपलब्ध है और नमूने के रूप में भी, जैसा कि सुनवाई के दौरान प्रतिवादी (ईसीआई) द्वारा स्वीकार किया गया है, आरटीआई अधिनियम के तहत एक सूचना है।’’ हैदर ने सूचना का अधिकार कानून के तहत इलेक्ट्रॉनिक वोंिटग मशीन के मॉडल अथवा सामग्री होने के नाते नमूने के रूप में एक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया था।

आदेश में ईवीएम छेड़छाड़ के आरोपों के मद्देनजर बड़े जनहित के मुद्दे का उल्लेख नहीं किया गया है। ईसीआई ने दलील दी थी कि मशीन में डाला गया साफ्टवेयर तीसरे पक्ष की बौद्धिक संपत्ति है जिसे सीआईसी ने नोट किया लेकिन उन्होंने अपने आदेश को सीमित करते हुए कहा कि ईसीआई द्वारा आवेदन खारिज करना ‘‘गलत’’ था और आरटीआई प्रावधानों के अनुसार एक नया जवाब आवेदक को भेजा जाना चाहिए। कई विपक्षी नेताओं ने ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष अपने ‘‘संदेह’’ उठाये थे। विपक्षी पार्टियों ने मतपत्रों से चुनाव कराये जाने की मांग की थी लेकिन ईसी ने स्पष्ट कर दिया था कि ऐसा नहीं किया जायेगा।