तेलंगाना: मतदाता सूची से लाखों नाम गायब आरटीआई से खुलासा

मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड लिंक के पहल में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में लाखों मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो गए. 2015 में चुनाव आयोग की इस पहल से तेलंगाना के करीब 30 लाख और आंध्र प्रदेश के 25 लाख मतदाता प्रभावी हुए हैं.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी सामने आई है. कुछ ही महीनें में लोकसभा चुनाव है. ऐसे में यह मुद्दा चुनाव आयोग की सिरदर्दी बन सकता है.

8 अगस्त 2015 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी भनवर लाल ने भी इस मामले को लेकर चुनाव आयोग को लिखे एक पत्र में अवगत कराया था. पत्र में उन्होंने लिखा था कि ग्रेटर हैदराबाद महानगरपालिका की ओर से मतदाता पहचान पत्र के सत्यापन को ठीक से अंजाम नहीं दिया गया गया है. हालांकि उनके मुताबिक राज्य के दूसरे इलाकों में ऐसी स्थिति नहीं देखने को मिली.

चुनाव आयोग ने मतदाता पहचान पत्र के सत्यापन और प्रमाणीकरण से जुड़ा अभियान मार्च 2015 में शुरू किया था. और यह सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोक लगाने तक 11 अगस्त 2015 तक चलता रहा था.

इससे पहले 8 अगस्त 2015 को भनवर लाल ने चुनाव आयोग को लिखा था, “आंध्र प्रदेश में 76 फीसदी मतदाता पहचान पत्र को आधार से लिंक कर दिया गया है. तेलंगाना में ग्रेटर हैदराबाद महानगरपालिका को छोड़ कर 84 फीसदी लोगों के पहचान पत्र को आधार कार्ड से लिंक किया जा चुका है. ग्रेटर हैदराबाद के 24 विधान सभा में यह अब तक 45 फीसदी तक ही हो सका है. इससे यह मालूम पड़ता है कि सत्यापन के काम को ठीक से पूरा नहीं किया गया है.”

लोकसभा चुनाव से पहले आरटीआई से मिली इस जानकारी पर प्रतिक्रिया रखते हुए तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का मानना है, “फौरी तौर पर किसी का भी नाम सूची से बाहर नहीं किया गया है. इनमें से 5 फीसदी को शामिल भी कर लिया गया है. विधान सभा चुनाव के दौरान हमने 26 लाख नए मतदाताओं को शामिल किया था. हाल ही में तैयार किए गए सूची में भी 17 लाख लोगों को जोड़ा गया है.”

इस मामले पर मतदाताओं को लेकर काम करने वाली एक संस्था स्वेच्छा का मानना है, 2018 विधान सभा चुनाव के समय भी सूची से मतदाताओं के नाम गायब थे. कुछ ही महीने में लोकसभा का चुनाव है. यही स्थिति तब भी बरकरार रहने वाली है.